
किशन सिन्हा/छत्तीसगढ़ क्राइम्स
राजिम. शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लक्ष्य से शुरू हुए स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में अपने बच्चों को उचित शिक्षा अर्जित करवाने के आस में पलक गण उचित और अनुचित का फर्क ही मिटा दे रहे हैं ऐसा ही एक ताजा मामला राजिम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आया है जहां फर्जी अंक सूची एवं स्थानांतरण प्रमाण पत्र बना कर प्रस्तुत करने वाले पालक के विरुद्ध अपराध दर्ज कर कार्यवाही करने बाबत् कलेक्टर गरियाबंद जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबंद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व राजिम को शिकायत आवेदन प्रस्तुत किया गया है.
मिली जानकारी के अनुसार राजिम के समीपस्थ ग्राम कोमा के आर टी आई कार्यकर्ता धनेंद्र तारक ने सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार राजिम के शासकीय पंडित राम विशाल पांडे उत्कृष्ट इंग्लिश मीडियम स्कूल में फर्जी अंक सूची एवं स्थानांतरण प्रमाण पत्र के संबंध में प्राचार्य संजय एक्का के द्वारा तीन सदस्य जांच समिति गठन की गई थी जिसमें समिति के सदस्य राजकुमार यादव व्याख्याता विक्रम सिंह व्याख्याता एवं अंगेश गैंगेल सहायक शिक्षक सामिल थे इस संबंध में जांच समिति ने अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया था जांच प्रतिवेदन के अनुसार यह सत्य पाया गया कि पांच विद्यार्थी जिसमें
पहला नाम कुंदन साहू पिता नीलम साहू कक्षा पांचवी,
दूसरा कु. पूर्वी साहू पिता नीलम साहू कक्षा तीसरी
तीसरा सागर साहू पिता पवन साहू कक्षा दूसरी
चौथा याचना साहू पिता राजेंद्र साहू कक्षा पांचवी और
पांचवा सनत साहू पिता राजेंद्र साहू कक्षा तीसरी
इनके द्वारा प्रस्तुत किए गए पूर्व कक्षा की अंक सूची एवं स्थानांतरण प्रमाण पत्र वास्तविक नहीं है तथा संबंधित पालकों ने गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल आरंग जिला रायपुर के अंक सूची प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए गए थे. वहीं इस विद्यालय के प्राचार्य ने जांच समिति को लिखकर दिया है कि उक्त दस्तावेज गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल आरंग के द्वारा जारी नहीं किए गए हैं और नहीं उक्त विद्यार्थी इस संस्था में अध्ययन किए हैं.
इस पर उन पांचो बच्चों के पालकों ने भी लिखित बयान देकर स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने बच्चों के नाम पर जो अंक सूची स्थानांतरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए हैं वे सभी उन्होंने फर्जी तरीके से बनवाए हैं ताकि स्वामी आत्मानंद स्कूल राजिम में एडमिशन आसानी से हो जाए.
जाँच समिति द्वारा साक्ष्य के रूप में जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं उनसे यह प्रमाणित होता है कि संबंधित पालकों द्वारा उनके बच्चों के प्रवेश के लिए प्रस्तुत किए गए अंकसूची एवं स्थानांतरण प्रमाण पत्र पूर्णतया असत्य है. शासन के द्वारा चलाए जा रहे जन कल्याण करी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के आश में कुछ लोगों द्वौर इस प्रकार का अनुचित कदम उठान ना सिर्फ अपराध है बल्कि उन लाभार्थियों के लिए निराशा का कारक हैं जो इन योजनाओं के वास्तविक हक दार हो सकतें हैं।