
नेहरू मेडिकल कॉलेज समेत एम्स में वायरोलॉजी लैब उपलब्ध है। यहां जांच के लिए आरटीपीसीआर किट भी उपलब्ध है। नेहरू मेडिकल कॉलेज में माइक्रो बायोलॉजी विभाग की एचओडी डॉ. निकिता शेरवानी के अनुसार किट पर्याप्त संख्या में है। अभी किसी मरीज की जांच नहीं की गई है। सैंपल आएंगे तो जांच की पूरी व्यवस्था है। दरअसल, प्रदेश में एक केस मिलने के कारण सैंपलिंग अभी शुरू नहीं हुई है।
राजधानी में कोरोना का एक मरीज मिला है, जो खतरे से बाहर है। जांच में अगर कोरोना जैसे लक्षण वाले मरीज आ रहे हैं और आरटीपीसीआर जांच की रिपोर्ट नेगेटिव है तो यह वायरल निमोनिया हो सकता है। लगातार बुखार, सांस लेने में तकलीफ व गले में खराश है तो जांच कराएं। भीड़भाड़ से बचें, मास्क पहनें और लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से इलाज करवाएं। डरें नहीं और न घबराएं।जांच के लिए वायरोलॉजी लैब उपलब्ध
डॉक्टरों का कहना है कि सिंगापुर व हांगकांग में फैले वायरस के जेएन 1 तथा एलएफ 7 वेरिएंट भारत में पहुंच चुका है। हालांकि इसकी पुष्टि के लिए जीनोम सीक्वेंसिंग जरूरी है। डब्ल्यूएचओ ने पहले ही जेएन 1 को वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट घोषित कर दिया है। यह वेरिएंट मौजूदा वैक्सीनेशन या पूर्व संक्रमण से बनी इम्युनिटी को चकमा देने में सक्षम है। हालांकि डब्ल्यूएचआ की मानें तो मोनोवैलेंट बूस्टर से कुछ हद तक सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन भारत में यह बूस्टर अभी ज्यादा उपलब्ध नहीं है। देश में कोरोना के मरीज भले ही कम हैं, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एहतियात के तौर पर फिर से अपना कोविड-19 डैशबोर्ड चालू कर दिया है। देश में अभी 257 से ज्यादा एक्टिव केस हैं।