कोरोना वैक्सीन की भारत में कीमत आ गयी सामने, जानिये सरकार को कितने में मिलेगी, प्राइवेट मार्केट में इसकी क्या कीमत होगी ?

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नयी दिल्ली । सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) और केंद्र सरकार के बीच वैक्सीन की कीमत तय करने के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन होने जा रहा है, जिसमें टीके की कीमत 250 रुपए प्रति खुराक/डोज की दर पर तय होने की संभावना है। मीडिया रिपोर्ट में इस मामले से जुड़े लोगों के हवाले से बताया गया है कि सरकार को कोरोना वैक्सीन की बड़े पैमाने पर सप्लाई के लिए सीरम इंस्टीट्यूट से काफी उम्मीद है, जिसने सोमवार को औपचारिक आवेदन देकर एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कोविशील्ड के इमरजेंसी उपयोग के लिए अनुमति मांगी है।

इससे पहले सीरम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अदार पूनावाला ने कहा था कि भारत के निजी बाजार में वैक्सीन की कीमत 1,000 रुपये ($13।55) प्रति खुराक होगी, लेकिन ज्यादा सप्लाई के लिए कॉन्ट्रैक्ट करने वाली सरकारें इसे कम कीमतों पर भी खरीद सकती हैं।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला पहले ही कह चुके हैं कि भारत में निजी बाजार में वैक्सीन की खुराक एक हजार रुपये प्रति डोज हो सकती है. हालांकि सरकार के साथ आपूर्ति के लिए एक बड़ी डील होनी है, जिसके कारण इसकी कीमतें सरकार की डील में कम हो सकती है. कोरोना वैक्सीन के वितरण के लिए अदार पूनावाला पहले ही साफ कर चुके हैं कि पहले इस वैक्सीन की सप्लाई भारत में की जाएगी, इसके बाद अन्य देशों में कोरोना वैक्सीन की सप्लाई की जाएगी.

इससे पहले, सीरम इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) 6 दिसंबर को भारत में ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके ‘कोविशील्ड’ के आपातकालीन उपयोग की औपचारिक मंजूरी प्राप्त करने के लिए भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) के समक्ष आवेदन दिया था। सूत्रों के मुताबिक कंपनी ने महामारी के दौरान चिकित्सा आवश्यकताओं और व्यापक स्तर पर जनता के हित का हवाला देते हुए यह मंजूरी दिए जोन का अनुरोध किया है।

वहीं, एसआईआई ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ मिलकर बीते रविवार को देश के विभिन्न हिस्सों में ऑक्सफोर्ड के कोविड-19 टीके ‘कोविशील्ड’ के तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण भी किया। आधिकारिक सूत्रों ने एसआईआई के आवेदन का हवाला देते हुए कहा कि कंपनी ने बताया है कि क्लीनिकल परीक्षण के चार डाटा में यह सामने आया है कि कोविशील्ड लक्षण वाले मरीजों और खासकर कोविड-19 के गंभीर मरीजों के मामले में खासी प्रभावकारी है। चार में से दो परीक्षण डाटा ब्रिटेन जबकि एक-एक भारत और ब्राजील से संबंधित है।

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