इस साल दो माह तक चलेगी बर्फानी बाबा अमरनाथ की यात्रा, राजधानी से पहला जत्था 27 जून को निकलेगा

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रायपुर। हर साल हिंदू संवत्सर के श्रावण महीने में बर्फानी बाबा अमरनाथ की यात्रा लगभग 45 दिनों तक चलती है, लेकिन इस साल श्रावण महीने में पुरुषोत्तम माह का संयोग बन रहा है। इसके चलते श्रावण मास 60 दिनों का रहेगा।

पुरुषोत्तम माह के कारण अमरनाथ यात्रा भी श्रावण माह के अंतिम दिन रक्षाबंधन तक चलेगी। इस तरह 60 दिनों तक यात्रा चलेगी। प्रदेशभर में यात्रा पर जाने की तैयारी में श्रद्धालु जुट गए हैं। राजधानी से पहला जत्था 27 जून को रवाना होगा और एक जुलाई को होने वाले पहले दर्शन का लाभ श्रद्धालु लेंगे।

25 साल से लगातार अमरनाथ की यात्रा पर जा रहे गंगाप्रसाद यादव बताते हैं कि वे पहले जत्थे में रवाना होंगे। उनके साथ राजधानी से 300 से अधिक श्रद्धालु जाएंगे। पहले जत्थे में प्रदेशभर से 700 से अधिक श्रद्धालु दर्शन लाभ लेंगें। इसके पश्चात पूरे दो माह तक अलग-अलग जत्थे में श्रद्धालु रवाना होंगे।

यात्रा पर जाने से पूर्व दे रहे जरूरी जानकारी

जो लोग पहले यात्रा कर चुके हैं, वे अपने नाते, रिश्तेदारों, परिचितों को यात्रा पर जाने से पहले क्या-क्या चीजें साथ में रखनी चाहिए और यात्रा से पहले क्या करना चाहिए। अपने अनुभव के आधार पर वे जानकारी दे रहे हैं। बूढ़ा तालाब स्थित अमरनाथ सेवा समिति के कार्यालय में जानकारी लेने पहुंचने वालों को गंगा प्रसाद यादव सलाह देते हैं कि सबसे पहले अपना मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाएं।

रायपुर जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य परीक्षण में कम से कम दो-तीन दिन का समय लगेगा। प्रमाणपत्र हासिल करने के पश्चात जम्मू एंड काश्मीर बैंक में पंजीयन करवाकर यात्रा की तारीख हासिल करें। इसके लिए कुछ रुपये पंजीयन करने के देने होंगे। तारीख मिलने के बाद ट्रेन की टिकट बुक कराएं। यात्रा पूरी करके राजधानी लौटने में कम से कम 10 दिन लगेंगे।

ऐसे करें यात्रा

रायपुर से जम्मू तक ट्रेन से जाएं। इसके बाद पहलगाम पहुंचकर रायपुर से बनवाकर ले गए पंजीयन प्रपत्र को दिखाकर अमरनाथ श्राइन बोर्ड से आइकार्ड हासिल करें। अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए चंदनवाड़ी और बालटाल दो मार्ग है। चंदनबाड़ी मार्ग से भोलेनाथ की पवित्र गुफा 32 किलोमीटर और बालटाल से 14 किलोमीटर दूर है।

पहले जत्थे यात्रा ऐसे होगी पूरी

रायपुर स्टेशन से यात्रा 27 जून को शुरू होगी और 28 जून की रात जम्मू पहुंचेंगे। जम्मू से 29 जून को सुबह वाहन से पहलगाम पहुंचकर विश्राम करेंगे। 30 जून को पहलगाम से चंदनबाड़ी होते हुए शेषनाग कैम्प पहुंचेंगे। 1 जुलाई को सुबह शेषनाग कैम्प से पंचतरणी कैम्प पहुंचकर विश्राम करेंगे। 2 जुलाई को पंचतरणी से श्रीअमरनाथ गुफा पहुंचकर बाबा अमरनाथ का दर्शन करके विश्राम करेंगे।

3 जुलाई को बाबा अमरनाथ गुफा से बांस टाल पहुंचेंगे। 4 जुलाई को बांसटाल से कटरा पहुंचकर माता वैष्णोदेवी के दर्शन करके विश्राम करेंगे। 5 जुलाई को कटरा से निकलकर वापसी में स्वर्ण मंदिर, बाघा बार्डर, दिल्ली होते हुए श्रद्घालु 6 जुलाई को वापस राजधानी पहुचेंगे।

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