ट्रेनों की लेटलतीफी की वजह से यात्री ज्यादा परेशान हैं। क्योंकि उनका सफर समय पर पूरा हो नहीं हो रहा है। सबसे अधिक परेशान उस वक्त झेलनी पड़ती है, जब कनेक्टिविटी वाली ट्रेनें छूट जाती हैं। ऐसे में यात्री कहीं के नहीं रह जाते। ऐसा इसलिए हो रहा है कि रेलवे के कई सेक्शनों में रेल पटरी पर चल रहे काम का सीधा असर ट्रेनों के परिचालन पर पड़ता है। वहीं, रेलवे स्टेशन में भी उतनी भीड़ रहती हैं, जितना कि उतरने वालों की। ट्रेन आने का इंजतार करते हुए यात्री काफी समय स्टेशन में बिताते हैं। स्थिति यह है कि लंबी दूरी की ट्रेनें ज्यादा देरी से चल रही हैं।
दिल्ली, मुंबई, पुणे, कोलकाता, राजस्थान, गुजरात, बिहार जैसे प्रमुख शहरों से आने वाली ट्रेनें हर दिन देरी से पहुंच रही हैं। इन ट्रेनों की प्रतीक्षा के दौरान जितने यात्री वेटिंग हॉल में होते हैं, उतने ही प्लेटफार्म पर नजर आते हैं। स्टेशन के परिचालन कक्ष में हर दिन औसतन 3 से 4 घंटे देरी से ट्रेनें चलने का रिकॉर्ड दर्ज हो रहा है। खासतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनें, जो ट्रेनें रायपुर, बिलासपुर रेल मंडल से चलती हैं, उनका परिचालन सुधरा हुआ है।