प्रदेश के सात निकायों में वेस्ट टू इलेक्ट्रिसिटी प्लांट लगाने की योजना है। हालांकि अभी तक इस योजना पर काम शुरू नहीं हुआ है। प्रथम चरण में तीन निकायों रायपुर, दुर्ग और भिलाई नगर निगम वेस्ट-टू-इलेक्ट्रिसिटी प्लांट लगाने की योजना है। इसके लिए प्रस्ताव से इन निकायों से संचालनालय नगरीय प्रशासन को भेजा गया है। प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इस कारण से मामला अटका हुआ है।
आय होगी, खर्च बचेगा, बिजली मिलेगी
वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगने से नगर निगम की न केवल आय होगी, बल्कि कूड़े का निस्तारण पर होने पर खर्च भी बचेगा। साथ ही बिजली मिलेगी, वह भी मुफ्त। नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक यहां उत्पन्न हुई बिजली छग पावर कारपोरेशन को बेची जाएगी। जिससे नगर निगम का विद्युत खर्चा काफी हद तक निकल आएगा।
इन निकायों में लगाए जाएंगे प्लांट
फिलहाल उक्त योजना के पायलट प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश के सात निकायों का चयन किया गया है, जिनमें रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर, रतनपुर, बोदरी और मुंगेली शामिल हैं।
हर दिन निकल रहा सैकड़ों टन कचरा
बता दें कि प्रदेशभर के निकायों में हर दिन सैकड़ों टन कचरा निकल रहा है। राजधानी रायपुर नगर निगम में हर दिन लगभग 750 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। कई जगह से नियमित कचरा निगम द्वारा नहीं उठाया जाता है। अन्य निकायों बिलासपुर, दुर्ग- भिलाई, धमतरी, जगदलपुर, कोरबा सहित अन्य की बात करें तो यहां भी हर दिन 400 से 500 टन कचरा निकलता है।
10 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन
सात निकायों के लिए राज्य शासन के नगरीय प्रशासन विभाग ने केंद्र सरकार के शहरी आवासन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें करीब 400 करोड़ रुपए की मांग की गई है। केंद्र सरकार से राशि स्वीकृत होते ही उक्त निकायों में वेस्ट टू इलेक्ट्रिसिटी प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन शुरू किया जाएगा। इन निकायों में 10 मेगावाट का बिजली उत्पादन किया जाएगा।