सात गांव के ग्रामीणों ने दी विधानसभा चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

Chhattisgarh Crimes

किशन सिन्हा/ छत्तीसगढ़ क्राइम्स

छुरा. भारतवर्ष में लोकतंत्र का सबसे बड़ा महापर्व निर्वाचन की प्रक्रिया को कहा जाता है जिसके माध्यम से जनता का जनता के लिए जनता के द्वारा संचालित शासन की प्राप्ति होती है। और वह शासन जनता के अनुरूप पूर्ण रूप से संचालित होती है, लेकिन जब वही जनप्रतिनिधि अपने जनता के इच्छाओं की पूर्ति करने में असमर्थ हो जाये तो सवाल उठना लाजमी हो जाता है।

इसी तारतम्य में ग्राम पंचायत कुड़ेरादादर के लोग चुनाव बहिष्कार करने मजबूर हैं गरियाबंद जिले के छुरा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुड़ेरादादर एवं आस पास के छः से सात गांवों के लोग धान खरीदी केंद्र नहीं खुल पाने के मुद्दे को लेकर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं। किसानों की मानें तो उन्हें धान बेचने हेतु काफ़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है और आला अधिकारी एवं नेताओं तक चक्कर लगाने के बाद अब तक उनकी मांग पुरी नहीं होने के चलते आने वाले विधानसभा चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत कुड़ेरादादर व उनके आस पास के सात गांवों के लगभग चार सौ किसानों ने धान खरीदी केंद्र की मांग को लेकर नेता मंत्री व कलेक्टर जैसे आला अधिकारियों तक अपना गुहार लगा चुके हैं लेकिन किसी के भी तरफ से आश्वासन के शिवाय अभी तक कुछ हाथ नहीं आया हैं जबकि खरीब का फसल अब तौयार होने की स्थिति पर आ चुका है। और कृषक अब फसल की कटाई मिजाई कर सहकारी सोसायटी में बेचने की तैयारी में है बरहहाल अब यह देखना होगा कि प्रशासन किसानों को मनाने में सफल होती है या फिर सात गांव के लोग चुनाव बहिष्कार करेंगे यह आनेवाले दिनों में ही पता चल पायेगा।

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