
अकबर ने अपने पत्र में कहा है कि, प्रदेश के करीब 22.70 लाख पेंशनधारियों को पिछले लगभग 5 महीने से पेंशन नहीं मिली है। इस कारण गरीब, बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग हितग्राहियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि महंगाई के दौर में इन लोगों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है
पूर्व मंत्री ने कहा कि, प्रदेशभर में चल रहे सुशासन तिहार के दौरान मिलने वाले आवेदनों और शिकायतों में सबसे अधिक संख्या पेंशन नहीं मिलने से परेशान हितग्राहियों की है। इसके बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि, जब तक केंद्र सरकार से संबंधित मद की राशि प्राप्त नहीं होती, तब तक नियमों के तहत किसी अन्य मद से पेंशनधारियों को भुगतान कराया जाए। बाद में राशि मिलने पर उसका समायोजन किया जा सकता है। अकबर ने कहा कि पहले भी इस तरह की व्यवस्था की जा चुकी है।
संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला
मोहम्मद अकबर ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद-154 का उल्लेख करते हुए कहा कि, राज्य की कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल में निहित होती है। उन्होंने राज्यपाल से अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
अकबर ने कहा कि, सरकार को सबसे कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की चिंता करनी चाहिए। यदि समय रहते पेंशन राशि जारी नहीं की गई तो लाखों हितग्राहियों की परेशानी और बढ़ सकती है। उन्होंने मांग की कि वृद्ध, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को तत्काल बकाया भुगतान कर राहत दी जाए।