आपस में ही भिड़ गए MLC और स्पीकर, धक्कामुक्की की… कुर्सी से गिराया

Chhattisgarh Crimes

बेंगलुरु। कर्नाटक विधान परिषद में गोरक्षा विधेयक को लेकर जमकर हंगामा हुआ। बात इतनी बढ़ गयी कि एमएलसी आपस में हाथापाई करने लगे। कांग्रेस एमएलसी ने विधानसभा अध्यक्ष को जबरन खींचकर कुर्सी से उतार दिया।

कांग्रेसी एमएलसी का आरोप है कि भाजपा और जेडीएस ने गैरकानूनी ढंग से स्पीकर का चुनाव किया है। इसलिए उन्हें कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है। सदन में मंगलवार को गोरक्षा विधेयक पर चर्चा की जा रही थी, जिसे 9 दिसंबर को पास कराया गया है।

बीजेपी एमएलसी का कहना है कि शर्म आ रही है कि जनता उसके बारे में क्या सोच रही होगी। जिसमें कांग्रेस एमएलसी को स्पीकर का हाथ पकड़कर घसीटते हुए और कुर्सी को हटाते हुए देखा जा सकता है। बीजेपी का कहना है कि शर्म आ रही है कि जनता उसके बारे में क्या सोच रही होगी।

गोहत्या विरोध बिल पर चर्चा के दौरान बहस

दरअसल कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा में गोहत्या विरोध बिल पास करा लिया। कर्नाटक गोहत्या रोकथाम और मवेशी संरक्षण विधेयक 2020 के नाम से पारित हुए बिल में राज्य में गायों की हत्या के साथ ही भैंस की तस्करी, और अत्याचार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसी बिल पर आज विधान परिषद में चर्चा होनी थी।

हंगामे पर कांग्रेस एमएलसी की सफाई

अचानक सदन में हंगामा होने लगा और कांग्रेस एमएलसी ने जबरदस्ती विधान परिषद के अध्यक्ष को कुर्सी से उतार दिया गया। इस मामले में कांग्रेस एमएलसी प्रकाश राठौड़ ने सफाई में कहा कि जब सदन नहीं चल रहा था उस समय बीजेपी और जेडीएस ने अवैधानिक तरीकों से अध्यक्ष को कुर्सी पर बैठाया। दुर्भाग्य से बीजेपी ऐसे असंवैधानिक काम कर रही है। कांग्रेस ने अध्यक्ष से हटने को कहा। चूंकि वह अवैध रूप से कुर्सी पर बैठे थे इसलिए हमें उन्हें वहां से हटाना पड़ा।

कर्नाटक विधान परिषद में गुंडों जैसा बर्ताव

कर्नाटक बीजेपी एमएलसी लहर सिंह सिरोइया ने इसे गुंडों जैसा बर्ताव बताया। उन्होंने कहा, ‘कुछ विधायक गुंडों की तरह बर्ताव कर रहे थे। उन्होंने विधान परिषद के उपाध्यक्ष को जबरन कुर्सी से हटा दिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

हमने परिषद के इतिहास में ऐसा शर्मनाक दिन कभी नहीं देखा। मुझे शर्म आ रही है कि जनता हमारे बारे में क्या सोच रही होगी।’

कृषि बिल पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में फेंके गए थे माइक

बता दें कि यह पहला वाकया नहीं है इससे पहले भी ऐसे कई मौके आए जब कानून बनाने वालों के चलते लोकतंत्र को शमिंर्दा होना पड़ा। इसी साल सितंबर महीने में राज्यसभा में कृषि विधेयकों पर चर्चा के दौरान सांसदों के बीच धक्कामुक्की, माइक की तोड़फोड़, रूल बुक के पन्ने फाड़कर फेंकना, हल्ला और शोरगुल देखने को मिला था।