नक्सल सेंट्रल कमेटी बोली-15 महीने में 400 साथी मारे गए

Chhattisgarh Crimesनक्सलियों ने शांति वार्ता की अपील की, पर वही शर्तें फिर रखीं जिनके कारण अब तक वार्ता नहीं हो सकी

पहले भी पांच बार दे चुके हैं शांति वार्ता का प्रस्ताव

फोर्स के लगातार ऑपरेशन जारी रहने और नक्सलियों का सफाया होता जा रहा है। इसके चलते नक्सली खुद दहशत में आ गए हैं। इसी के चलते नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी की ओर से शांतिवार्ता के लिए पर्चा जारी किया गया है। नक्सलियों के केंद्रीय समिति के प्रवक्ता अभय के नाम से जारी पर्चें में कहा गया है कि सरकार ने बस्तर व अन्य नक्सल प्रभावित इलाके में सेना को मैदान में उतार दिया है। सेना की तैनाती से पहले उस इलाके को अशांत घोषित करना चाहिए, लेकिन चुपके से भारतीय सेना की तैनाती कर दी गई है।

पर्चे में लिखा है कि पिछले 15 महीनों में उनके 400 साथी मारे गए हैं। अगर राज्य और केंद्र सरकार नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन रोकती है, तो हम शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। अभय के नाम से जारी पर्चे में नक्सलियों के संगठन की एक बैठक जो 24 मार्च को हैदराबाद में आयोजित हुई थी, इसका जिक्र किया गया है।

लिखा गया है कि इस बैठक में ही शांति वार्ता और युद्ध विराम को लेकर विचार सामने आये और अब इसे सार्वजनिक किया जा रहा है। नक्सलियों की ओर से शांति वार्ता और वार्ता के लिए कमेटी बनाने के प्रस्ताव पांच बार सामने आ चुका है। पिछले एक साल में यह दूसरा मौका है जब नक्सलियों की ओर से शांति वार्ता का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन वे हर बार वार्ता के लिए ऐसी शर्तें सामने रखते हैं जिनसे वार्ता को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती।

फोर्स के मूवमेंट को रोकने समेत कई शर्तें रखीं
नक्सलियों के केंद्रीय प्रवक्ता ने शांति वार्ता के लिए जो प्रमुख शर्तें पर्चे में रखी हैं इनमें नक्सल मोर्चे में तैनात जवानों को कैंप के अंदर ही रखे जाने, जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सभी ऑपरेशन को बंद किए जाने की शर्त प्रमुख है। इसके अलावा एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है।

वहीं केंद्र और राज्य सरकारें छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र (गढ़चिरौली), ओडिशा, झारखंड, मध्यप्रदेश और तेलंगाना में ऑपरेशन के नाम पर हत्याओं और नरसंहार को रोकें। नए सशस्त्र बलों के कैंप की स्थापना रोकें। नक्सलवाद के खिलाफ अभी जवानों की जंग निर्णायक मोड़ पर है ऐसे में इस समय फोर्स को कैंपों में रखाना संभव नहीं है।

सरकार की दो टूक- वार्ता को तैयार, पर शर्तें मंजूर नहीं

गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि सरकार वार्ता के लिए तैयार है बशर्ते इसके लिए कोई शर्त न हो। उन्होंने कहा कि यदि नक्सली में मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं और वार्ता के इच्छुक हैं, तो उन्हें अपना प्रतिनिधि बताना चाहिए। शर्मा ने कहा कि वार्ता का स्वरूप आईएसआईएस जैसी किसी कट्टरपंथी विचारधारा की तर्ज पर नहीं हो सकता।

यदि कोई चर्चा करना चाहता है, तो उसे भारतीय संविधान की मान्यता स्वीकार करनी होगी। अगर संविधान को नकारते हैं और समानांतर व्यवस्था थोपने की कोशिश करते हैं, तो वार्ता का कोई औचित्य नहीं रहता। उन्होंने कहा कि नक्सली आत्मसमर्पण करें, पुनर्वास पाएं। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले एक से डेढ़ साल में 40 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है, जहां पहले तक नक्सली कानून थोपने की कोशिश करते थे।

सुरक्षित ठिकाने नहीं बचे,
नक्सलियो के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन से नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने छिन गए हैं। बस्तर में सक्रिय एरिया कमेटी अब खत्म हो गई है। दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिलों की सीमा पर अबूझमाड़ इलाके की थुलथुली भी सुरक्षित नहीं बची।

हुई मुठभेड़ में हुआ था, जहां 38 नक्सली मारे गए थे। इसमें अब तक बस्तर में जवानों को सबसे बड़ी सफलता से नक्सलियों को बड़ा झटका लगा था। इसके बाद माड़ में नक्सली अब रुक नही पा रहें हैं। बड़े नक्सली लीडर्स के मारे जाने से नक्सली अब शांतिवार्ता के लिए आगे आ रहे हैं।

बीजापुर: जवानों पर हमला
सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता अभय की ओर से तेलुगू भाषा में लिखे गये शांतिवार्ता वाला पत्र बुधवार वायरल हुआ। इसी दौरान बीजापुर में नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया, जिसमें दो जवान घायल हो गये हैं और उन्हें इलाज के लिए रायपुर भेजा गया है।