प्रदेश के 6 सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस पास 800 से ज्यादा छात्रों को दो साल की बॉन्ड पोस्टिंग का इंतजार है। उनकी इंटर्नशिप 28 फरवरी को पूरी हो गई है। पिछले साढ़े 3 माह से छात्र पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं।
लाख पेनल्टी का प्रावधान, इसलिए जाने लगे
दो साल के बॉन्ड में नहीं जाने पर छात्र-छात्राओं की कैटेगरी अनुसार, 20 से 25 लाख रुपए पेनल्टी देने का नियम है। एसटी, एससी व ओबीसी के छात्रों को 20 लाख व यूआर के छात्रों के लिए 25 लाख रुपए पेनल्टी निर्धारित है। अब न केवल ग्रामीण सेवा बल्कि कई छात्रों की पोस्टिंग मेडिकल कॉलेजों में भी होने लगी है। इस पर सवाल भी उठ रहे हैं।
पिछले साल हरेली में दी गई थी पोस्टिंग
पिछले साल लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण हरेली त्योहार के मौके पर जुलाई में पोस्टिंग दी गई थी। जबकि तब छात्रों की इंटर्नशिप 31 मार्च को पूरी हुई थी। पिछले साल पोस्टिंग में काफी देरी हुई थी। छात्र तीन बार स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी से भी मिले थे, हालांकि इसके बाद भी जुलाई में पोस्टिंग दी गई। ग्रामीण सेवा में जाने वाले एमबीबीएस छात्रों को सामान्य क्षेत्रों के लिए हर माह 57150 रुपए व अनुसूचित क्षेत्र के लिए 69850 रुपए मानदेय दिया जा रहा है। नियमानुसार छुट्टी की भी पात्रता है। ये छात्र कई बार प्री पीजी की तैयारी करते हैं। पोस्टिंग के बाद भी अस्पतालों में ज्वॉइन नहीं करते।
भर्ती 3 साल से अटकी
प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों व इससे संबद्ध अस्पतालों में 6300 से ज्यादा नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती तीन साल से अटकी हुई है। आरक्षण रोस्टर तय नहीं होने के कारण भर्ती में लगातार देरी हो रही है। संभाग व जिला के रोस्टर में किस रोस्टर का पालन किया जाएगा, अधिकारी यही तय ही नहीं कर पा रहे हैं। प्रदेश में पहली बार प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एक साथ भर्ती करने की योजना फेल होती दिख रही है। यह भर्ती व्यापमं के माध्यम से होनी है। तीन साल पहले डीएमई कार्यालय के प्रस्ताव के बाद व्यापमं ने भर्ती के लिए हरी झंडी भी दे दी थी।
50 फीसदी आरक्षण के अनुसार भर्ती
सितंबर 2022 में हाईकोर्ट ने 58 फीसदी आरक्षण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद राज्य सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2023 में इस पर स्टे दे दिया था। डीएमई कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, 58 फीसदी आरक्षण पर भर्ती उन पदों पर की जा रही है, जिसकी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी, इसलिए 58 फीसदी आरक्षण के अनुसार भर्ती नहीं की जा सकती। इसलिए व्यापमं को प्रस्ताव बनाकर भी नहीं भेजा गया। रोस्टर कब तय होगा, अधिकारी यह तय नहीं कर पा रहे हैं। लगातार देरी होने से अभ्यर्थियों में मायूसी भी है।
अंबिकापुर मेडिकल में कॉलेज करेगा भर्ती
हाईकोर्ट ने कांकेर मेडिकल कॉलेज में 539 पदों पर हो रही भर्ती पर स्टे दिया था। जगदलपुर के आधा दर्जन से ज्यादा आवेदकों ने 58 फीसदी आरक्षण के अनुसार हो रही भर्ती को कोर्ट में चुनौती दी थी। महासमुंद, कोरबा, दुर्ग मेडिकल कॉलेजों को भर्ती का इंतजार है। दरअसल ये कॉलेज नए खुले हैं और स्टाफ की जरूरत है।