आम आदमी पार्टी ने धान खरीदी के मुद्दे पर 10 फरवरी को मुख्यमंत्री निवास के घेराव का ऐलान किया है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि धान का भुगतान निकालने के लिए किसान सहकारी बैंकों में सुबह 6 बजे से देर रात तक कड़ी धूप में लाइन लगाने को मजबूर हैं। इसके बावजूद बैंक एक बार में केवल 25 हजार रुपए ही भुगतान कर रहे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार ने साजिश के तहत लाखों छोटे किसानों से जबरन रकबा समर्पण करवाया, जिससे वे धान बेचने से वंचित रह गए।
पार्टी का कहना है कि इस बार धान खरीदी केंद्रों की प्रतिदिन की लिमिट कम कर दी गई, जिसके कारण किसान सिर्फ टोकन लेकर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हुए। टोकन काटने से पहले पटवारी, आरआई और तहसीलदारों द्वारा किसानों के घर जाकर भौतिक सत्यापन किया गया। आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या सरकार किसानों को संदेह की नजर से देख रही है? पार्टी का आरोप है कि सरकार की मंशा ही धान खरीदने की नहीं थी, इसलिए लगातार बहाने बनाए गए।
केंद्र की ट्रेड डील पर भी सवाल आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार की अमेरिका के साथ नई ट्रेड डील को किसान विरोधी बताया। पार्टी का कहना है कि इस समझौते से अमेरिका के कृषि और डेयरी उत्पाद सस्ते दामों पर भारत में आएंगे, जिससे देश की कृषि व्यवस्था और किसानों को भारी नुकसान होगा।
3 लाख किसान अब भी धान बेचने से वंचित पार्टी का दावा है कि छत्तीसगढ़ में अब भी करीब 3 लाख किसान धान बेचने से वंचित हैं। ऐसे में जिन किसानों ने कर्ज लिया है, उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी ने कहा कि किसानों की बदहाली के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है और धान खरीदी में सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है।
28 फरवरी तक बढ़ाने की मांग आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि जिन किसानों से जबरन रकबा समर्पण करवाया गया है, उसके लिए सरकार माफी मांगे। साथ ही सभी किसानों के लिए समुचित टोकन व्यवस्था लागू की जाए और जरूरत पड़ने पर सहकारी समितियों के जरिए सीधे धान खरीदी की जाए। पार्टी ने 6 फरवरी को समाप्त हुई धान खरीदी की समय-सीमा को 28 फरवरी तक बढ़ाने की भी मांग की है, ताकि प्रदेश का अन्नदाता किसान अपना एक-एक दाना बेच सके।
आम आदमी पार्टी ने साफ किया है कि किसानों की मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।