महासमुंद जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहीं। ज्ञापन सौंपने एसडीएम कार्यालय पहुंचीं हड़ताली महिलाएं अधिकारियों की गैरमौजूदगी से आक्रोशित हो गईं और परिसर में ही धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस हड़ताल से जिले के 27 हजार बच्चे पोषण आहार से वंचित रहे।
छत्तीसगढ़ जूझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका कल्याण संघ सहित संयुक्त मंच के बैनर तले जिले की 3600 कार्यकर्ता और सहायिकाएं हड़ताल में शामिल थीं। समापन से पहले कर्मचारी भवन से रैली निकालकर वे तहसील कार्यालय पहुंचीं। अधिकारियों के नदारद रहने पर उन्होंने कार्यालय परिसर में ही धरना दिया। संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि ज्ञापन सौंपने की सूचना पहले ही दी गई थी।कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों ने अधिकारियों को इसकी सूचना दी और महिलाओं को समझाने का प्रयास किया। काफी समझाइश के बाद महिलाएं कार्यालय के कर्मचारियों को ज्ञापन सौंपने पर राजी हुईं। इस दो दिवसीय हड़ताल के कारण जिले के 1800 आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे।
हड़ताल के चलते बच्चों का टीकाकरण, पोषण ट्रैकर और शाला पूर्व अनौपचारिक शिक्षा (ईसीसीई) भी प्रभावित हुई।
बता दें कि केन्द्र सरकार से सहायिकाओं को महज 2250 रुपये और कार्यकर्ताओं को 4500 रुपये मानदेय मिलता है। राज्य सरकार का अंश कार्यकर्ता को 5500 और सहायिकाओं को 2750 जो कुल 5 हजार मिलता है। और इसी तरह कार्यकर्ताओं को दोनों अंश मिलकर 10 हजार मिलता है।
लेकिन पेंशन, ग्रेच्युटी, समूह बीमा और चिकित्सा अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पारिवारिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना कठिन हो रहा है। अवकाश लेने पर मानदेय कटौती के आरोप भी लगाए गए हैं।
आंगनबाड़ी कर्मियों से महिला एवं बाल विकास विभाग के अलावा अन्य विभागों के कार्य भी लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार सभाओं में भीड़ जुटाने जैसे कार्यों में भी उन्हें लगाया जाता है।
पदाधिकारियों का कहना है, ‘काम के समय हमें शासकीय कर्मचारियों से अधिक जिम्मेदार माना जाता है, लेकिन अधिकार और सुरक्षा शून्य है। संघ का कहना है मांग पूरी नही होती है तो 9 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा। इसके बाद भी कोई सुनवाई नही होने पर आगे अनिश्चितकालीन धरान प्रदर्शन के लिए संघ बाध्य होंगे।