छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में आज ईडी के स्पेशल कोर्ट में सुनवाई चल रही है। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल समेत 59 आरोपी कोर्ट में पेश हुए। इसमें 28 आबकारी अधिकारी भी शामिल हैं। सुबह से ही अधिकारी कोर्ट में पहुंचे हुए हैं।
सभी आरोपियों का धारा 88 के तहत बयान दर्ज किया गया है। इस मामले में अब कुल 82 आरोपी बनाए गए हैं। इससे तीन दिन पहले EOW ने कार्रवाई करते हुए दो शराब निर्माता कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उनके ट्रक जब्त किए थे।
इसके अलावा, शराब घोटाला केस में कांग्रेस प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में कार्यरत अकाउंटेंट समेत 4 लोगों को पूछताछ के लिए EOW दफ्तर तलब किया गया था। उनसे कई घंटे तक पूछताछ की गई थी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष गिरफ्त से बाहर
शराब घोटाला मामले में जांच कर रही EOW- ED प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल की तलाश कर रही है। वे पिछले कई सालों से फरार बताए जा रहे हैं। दोनों ही एजेंसी उनकी भूमिका को लेकर भी गंभीरता से जांच कर रही है और उनसे जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला ?
शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है।
ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।
A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला
A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन
2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।