कबीरधाम पुलिस ने धोखाधड़ी मामले में पल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) कंपनी के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया

Chhattisgarh Crimesकबीरधाम पुलिस ने धोखाधड़ी मामले में पल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) कंपनी के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों पर लोगों को अधिक ब्याज और कम समय में राशि दोगुनी करने का लालच देकर निवेश कराने और बाद में पैसे वापस न करने का आरोप है।

गिरफ्तार आरोपियों में गुरनाम सिंह (70) निवासी पंजाब के रूपनगर और गुरूजंत सिंह गिल (76) निवासी मोहाली पंजाब शामिल है। एसडीओपी आशीष शुक्ला ने अपील की है कि, किसी भी संस्था या कंपनी में निवेश करने से पहले उसकी वैधानिकता और विश्वसनीयता की जांच जरूर करें। किसी भी संदिग्ध निवेश योजना की सूचना तत्काल पुलिस को दें।

इन लोगों ने की थी शिकायत

पीड़ित ढेलउ राम साहू (50) निवासी ग्राम महराटोला ने कवर्धा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी तरह पुनीता बाई निवासी ग्राम धनेली ने कुंडा थाने में रिपोर्ट लिखाई थी। दोनों शिकायतों में बताया गया था कि पीएसीएल कंपनी के एजेंटों और संचालकों ने आकर्षक लाभ का झांसा देकर लोगों से निवेश कराया, लेकिन बाद में उनकी राशि वापस नहीं की।

चिटफंड कंपनी पर केस दर्ज

इन शिकायतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ इनामी चिटफंड और धन परिचालन योजना (प्रतिषेध) अधिनियम की धारा 3, 4, 5, और छत्तीसगढ़ निक्षेपकों के हितों का संरक्षण अधिनियम की धारा 10 के तहत केस दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी थी।

जांच के दौरान यह सामने आया कि, कंपनी ने कुल 13,275 लोगों से करीब 29 करोड़ 72 लाख 41 हजार 178 रुपए जमा कराए थे। यह राशि निर्धारित ब्याज सहित निवेशकों को वापस नहीं की गई।

इन आरोपियों पर पहले हो चुकी है कार्रवाई

इस मामले में जांच के पहले भी कार्रवाई की गई थी। कंपनी के संचालक सुखदेव सिंह, तरलोचन सिंह, निर्मल सिंह भंगू, सुब्रतो भट्टाचार्य, अनिल चौधरी, जोगिंदर टाइगर, गुरमीत सिंह, सिकंदर सिंह और नरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है।

जेल में बंद थे दोनों आरोपी

हालिया जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली थी कि, आरोपी गुरनाम सिंह और गुरूजंत सिंह गिल उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की उरई जेल में बंद हैं। इसके बाद, कबीरधाम पुलिस ने प्रोडक्शन वारंट जारी करवाकर एक विशेष टीम को उत्तर प्रदेश भेजा।

टीम ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोनों आरोपियों को कबीरधाम लाया। उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।