छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में धोखाधड़ी के मामले में आरोपी छगनलाल वर्मा को गिरफ्तार किया गया

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में धोखाधड़ी के मामले में आरोपी छगनलाल वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। छगनलाल पर कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर भूमि का फर्जी नामांतरण कर ठगी करने का आरोप है। पुलिस ने बलौदाबाजार से फर्जी विक्रयनामा और फर्जी आधार कार्ड जब्त भी किया है।

बिलासपुर के रहने वाले सुनील छाबड़ा डीआरएस फार्म्स के पार्टनर हैं। उन्होंने 10 मार्च 2026 को सरगांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सुनील छाबड़ा ने बताया कि उनकी फर्म लैंड रिलेटेड बिजनेस करती है। कुछ समय पहले परिचित अरुण अडवानी ने उन्हें छगनलाल वर्मा से मिलवाया था।

एग्रीमेंट और जिम्मेदारी सौंपना

इसके बाद 22 अप्रैल 2022 को छगनलाल और फर्म के पार्टनरों के बीच एक एग्रीमेंट हुआ, जिसके तहत लैंड रिलेटेड काम, जैसे नामांतरण, सीमांकन आदि, छगनलाल वर्मा को सौंपे गए थे। एग्रीमेंट के बाद छगनलाल ने ग्राम मदकू, प.ह.न. 39 स्थित भूमि के स्वामी फिरंता दास पात्रे से संपर्क किया।

यह जमीन खसरा नंबर 245/2 रकबा 0.1820 हेक्टेयर, खसरा नंबर 257 रकबा 0.1380 हेक्टेयर और खसरा नंबर 750/2 रकबा 0.03 हेक्टेयर, कुल 0.3380 हेक्टेयर थी। इस जमीन का रजिस्ट्रेशन 8 मई 2023 को डीआरएस फार्म्स के पक्ष में कराया गया।

नामांतरण पर आपत्ति

इसी नामांतरण आवेदन पर नवीन कुमार एंड्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई। नवीन कुमार ने बताया कि उनके पिता जॉन एंड्रेस ने यह भूमि फिरंता दास पात्रे से 15 जुलाई 1975 को बैनामे के माध्यम से खरीदी थी। हालांकि जॉन की मौत के बाद तक भी इस जमीन का नामांतरण उनके नाम पर नहीं हो पाया था।

फर्जी तरीके से दोबारा रजिस्ट्रेशन

मामले में जमीन मालिक फिरंता दास पात्रे ने भी अनापत्ति शपथ पत्र पेश किया था। फिरंता और छगनलाल दोनों को 15 जुलाई 1975 को हुई बिक्री की जानकारी थी। जॉन के पक्ष में नामांतरण न होने का फायदा उठाते हुए, दोनों ने प्लानिंग के तहत और रकम के लालच में डीआरएस फार्म्स के पक्ष में जमीन का फिर से रजिस्ट्रेशन करवा दिया।

जांच में सामने आई साजिश

इस मामले में सरगांव थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 41/26, 318(4), 336(3), 338, 340(2), 61(2), 3(5) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। सरगांव पुलिस की जांच के दौरान सामने आया कि फिरंता दास पात्रे और छगनलाल ने आपस में साझेदारी में धोखाधड़ी की।

फर्जी दस्तावेज और लेनदेन

उन्होंने फर्जी आधार कार्ड बनाकर करीब 15 लाख रुपए की जमीन डीआरएस फर्म के नाम पर खरीदी। जांच में यह भी पता चला कि छगनलाल ने खुद विक्रय पत्र में गवाह बनकर पैसे लेने की बात स्वीकार की है। छगनलाल के पास से विक्रय रजिस्टर की सत्यापित और उसके इस्तेमाल किया गया फर्जी आधार कार्ड जब्त किया गया।

जांच में छगनलाल के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलने पर 31 मार्च को उसे गिरफ्तार किया गया और कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।