दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद उनके वित्तीय अधिकारों को लेकर फैसला लिया गया है। यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद ने कुलसचिव से जुड़े वित्तीय और बैंकिंग कामों में बदलाव किया है।
कार्यपरिषद ने अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. नीलू श्रीवास्तव को द्वितीय अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नियुक्त किया है। यह फैसला कार्यपरिषद की बैठक में लिया गया।
कार्यपरिषद का कहना है कि यह फैसला छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम और यूनिवर्सिटी के नियमों के तहत लिया गया है। इसमें परिनियम, अध्यादेश, विनियम और वित्तीय नियमों के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल किया गया है।
वहीं, कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप का कहना है कि कार्यपरिषद की बैठक में इस मुद्दे पर सभी सदस्य एकमत नहीं थे। इसलिए फैसला अभी प्रक्रिया में है। उनका कहना है कि उनके वित्तीय अधिकार खत्म करने का अधिकार केवल शासन के पास है।
21 अगस्त से लागू, अगले आदेश तक व्यवस्था
कार्यपरिषद के मुताबिक, विश्वविद्यालय के वित्तीय हितों को सुरक्षित रखने, प्रशासनिक कामकाज में निष्पक्षता बनाए रखने और कामकाज लगातार चलता रहे, इसके लिए यह व्यवस्था की गई है। यह फैसला 21 अगस्त 2026 से अगले आदेश तक लागू रहेगा।
अब विश्वविद्यालय के भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और बैंकिंग कामकाज में वित्त अधिकारी के साथ डॉ. नीलू श्रीवास्तव भी द्वितीय अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के तौर पर हस्ताक्षर करेंगी। यानी विश्वविद्यालय के भुगतान और बैंक से जुड़े वित्तीय कामों में उनकी भूमिका अब तय कर दी गई है।
कुलसचिव पर FIR दर्ज होने का जिक्र
कार्यपरिषद के संकल्प में कहा गया है कि कुलसचिव के खिलाफ FIR दर्ज होने और विश्वविद्यालय के वित्तीय व प्रशासनिक कामकाज में निष्पक्षता बनाए रखने की जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
कार्यपरिषद ने यह भी साफ किया है कि यह कदम किसी तरह के पूर्वाग्रह के चलते नहीं उठाया गया है। साथ ही, इसे कुलसचिव के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं माना जाएगा।
जिस मुद्दे पर फैसला, उसमें कुलसचिव नहीं रहे मौजूद
इस पूरे मामले में एक और अहम बात सामने आई है। कार्यपरिषद में जिस प्रस्ताव पर चर्चा हुई, उसमें कुलसचिव भूपेन्द्र कुमार कुलदीप को इस मामले से जुड़ा पक्ष माना गया। इसी वजह से वे इस मुद्दे पर हुई चर्चा में शामिल नहीं हुए।
कार्यपरिषद ने इस प्रस्ताव पर चर्चा और आगे की कार्रवाई के लिए डॉ. नीलू श्रीवास्तव को सदस्य-सचिव की जिम्मेदारी भी दी। इसके बाद वित्तीय अधिकारों से जुड़ा प्रस्ताव कार्यपरिषद के सामने रखा गया और उस पर फैसला लिया गया।