भिलाई नगर निगम चुनाव 2026 के लिए बुधवार को 70 वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई। आरक्षण की तस्वीर साफ होते ही कई मौजूदा पार्षदों और चुनाव की तैयारी कर रहे नेताओं के समीकरण बदल गए हैं। 23 वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें 8 वार्ड ओबीसी महिला और 15 वार्ड ओबीसी सामान्य के लिए हैं। इसके अलावा 3 वार्ड एसटी, 9 वार्ड एससी और 24 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए रखे गए हैं। सामान्य वर्ग के 24 वार्डों में 11 महिला आरक्षित हैं।
आरक्षण की प्रक्रिया सिविक सेंटर कला मंदिर में हुई। दुर्ग कलेक्टर अभिजित सिंह ने इसकी अध्यक्षता की। प्रशासन ने इसके लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया था। इससे पहले नगर निगम स्तर पर वार्डवार जनसंख्या और एससी-एसटी आबादी से जुड़े आंकड़े तैयार किए गए थे।
ओबीसी के 23 वार्ड, 8 महिलाओं के लिए ओबीसी के लिए आरक्षित 23 वार्डों में वार्ड 42 गौतम नगर खुर्सीपार, 7 राधिका नगर, 21 कैलाश नगर कुरूद, 56 सेक्टर-2 पश्चिम, 26 रामनगर मुक्तिधाम, 6 प्रियदर्शिनी परिसर, 40 शहीद चुम्मन यादव नगर छावनी, 19 राजीव नगर कोहका, 39 चंद्रशेखर आजाद नगर और 45 बालाजी नगर खुर्सीपार शामिल हैं।
इसके अलावा वार्ड 66 सेक्टर-7 पूर्व, 27 शास्त्री नगर, 10 लक्ष्मी नगर, 68 सेक्टर-8, 3 मॉडल टाउन, 46 दुर्गा मंदिर खुर्सीपार, 37 संत रविदास नगर, 38 सोनिया गांधी नगर, 54 सेक्टर-1 दक्षिण, 49 सुभाष मार्केट, 4 नेहरू नगर, 2 स्मृति नगर और 44 लक्ष्मीनारायण वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित किए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में भी ओबीसी के 23 वार्ड और 8 ओबीसी महिला वार्डों की पुष्टि हुई है ओबीसी महिला के वार्ड 6, 7, 26, 37, 38, 45, 54 और 66 हैं। बाकी 15 वार्ड ओबीसी सामान्य के लिए हैं।
एससी-एसटी के 12 वार्ड आरक्षण सूची के अनुसार एसटी के लिए वार्ड 52 और 62 सामान्य तथा वार्ड 61 महिला आरक्षित है। एससी के लिए वार्ड 1, 5, 8, 9, 32, 36, 43, 51 और 69 आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड 69 महिला आरक्षित है। इसके साथ ही सामान्य वर्ग के 24 वार्ड हैं। इनमें 11, 12, 15, 23, 24, 29, 35, 47, 48, 63 और 70 महिला आरक्षित हैं। इस तरह 70 वार्डों का पूरा आरक्षण वर्गवार तय हो गया है।
आरक्षण से सिटिंग पार्षदों की बढ़ी चिंता आरक्षण के बाद सबसे बड़ा असर उन पार्षदों और नेताओं पर पड़ा है, जो लंबे समय से अपने वार्ड से चुनाव की तैयारी कर रहे थे। वार्ड का आरक्षण बदलने से अब कई सिटिंग पार्षदों को नए वार्ड की तलाश करनी पड़ सकती है। राजनीतिक दलों के सामने भी प्रत्याशी चयन की चुनौती बढ़ गई है।
भाजपा ने कहा- हम आरक्षण प्रक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट भाजपा के जिला अध्यक्ष पुरुषोत्तम देवांगन ने आरक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताया। उन्होंने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर नियमों का पालन करते हुए एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण किया गया है। देवांगन ने कहा कि पहले की आरक्षण प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर आपत्तियां सामने आई थीं, लेकिन इस बार पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी रही। कांग्रेस की ओर से की गई आपत्तियों को उन्होंने निराधार बताया।
भाजपा बोली-70 वार्डों में लड़ेंगे, नए चेहरों को भी मौका सिटिंग पार्षदों के वार्ड बदलने के सवाल पर भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह आरक्षण प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है। भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है और सभी वार्डों में उसके कार्यकर्ता मौजूद हैं। टिकट वितरण के समय पार्टी काम करने वाले कार्यकर्ताओं को अवसर देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी 70 वार्डों में चुनाव लड़ेगी। पार्टी युवाओं और महिलाओं को भी मौका देगी। देवांगन ने निकाय चुनाव में भाजपा की जीत का दावा करते हुए कहा कि पार्टी शहर में महापौर, एमआईसी और अधिक से अधिक पार्षद जिताकर ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने की तैयारी में है।
कांग्रेस ने एससी-एसटी के 9 वार्डों पर जताई आपत्ति दूसरी ओर कांग्रेस के भिलाई जिला अध्यक्ष मुकेश चंद्राकर ने आरक्षण प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराने की बात कही है। उनका कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर पहले हुए आरक्षण और बाद के परिसीमन के बीच आरक्षण में बदलाव को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। चंद्राकर ने कहा कि एससी-एसटी के 9 वार्डों के आरक्षण में बदलाव को लेकर उनकी आपत्ति है। उन्होंने इसे आरक्षण की चक्रिय व्यवस्था से जोड़ते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराने की बात कही। हालांकि आरक्षण को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर उन्होंने कहा कि आपत्ति के निराकरण का जवाब पढ़ने के बाद ही इस पर स्पष्ट टिप्पणी की जाएगी।
कांग्रेस भी नए सिरे से बनाएगी रणनीति सिटिंग पार्षदों के वार्ड बदलने पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने कहा कि यह आरक्षण की चक्रिय व्यवस्था का हिस्सा है। परिसीमन और आरक्षण के बाद कई वार्डों की स्थिति बदलना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता मिलकर चुनाव की रणनीति तय करेंगे और योग्य प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा।
अब टिकट के लिए शुरू होगी खींचतान आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में टिकट के दावेदार सक्रिय होंगे। जिन वार्डों में सामान्य सीट बची है, वहां पहले से तैयारी कर रहे नेताओं की दावेदारी मजबूत हो सकती है। वहीं ओबीसी और महिला आरक्षित वार्डों में नए चेहरे सामने आने की संभावना है। खासकर 8 ओबीसी महिला और 11 सामान्य महिला वार्डों के आरक्षण से महिला दावेदारों के लिए नए अवसर बने हैं। वहीं जिन सिटिंग पार्षदों का वार्ड आरक्षित वर्ग में चला गया है, उनके सामने अब पार्टी के भीतर नए वार्ड से टिकट हासिल करने की चुनौती होगी।