छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के ग्राम कोटवारपारा तोयलंका में करीब 2 साल पहले हुई बिंदू सोढ़ी की हत्या के मामले में कोर्ट ने पिता-पुत्र को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने चैतु सोढ़ी और उसके बेटे कुम्मा सोढ़ी को हत्या का दोषी माना। दोनों को आजीवन कारावास के साथ 2-2 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं देने पर दोनों को एक-एक महीने की अतिरिक्त जेल होगी।
मामला कटेकल्याण थाना क्षेत्र का है। वारदात 24 जून 2024 की शाम करीब 6:30 बजे हुई थी। उस समय बिंदू सोढ़ी अपने परिवार के साथ खेत में धान की बुआई और जुताई करा रही थी। इसके लिए दूसरे गांव से ट्रैक्टर बुलाया गया था। इसी दौरान बिंदू का चाचा चैतु सोढ़ी (50) अपने बेटे कुम्मा सोढ़ी (31) के साथ कुल्हाड़ी लेकर खेत पहुंचा।
धान की बुआई को लेकर हुआ था विवाद
धान की बुआई को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया। चैतु ने बिंदू को जान से मारने की धमकी दी और कुल्हाड़ी लेकर उसके पीछे दौड़ा। बिंदू खेत की ढलान की ओर भागते समय गिर गई। इसके बाद कुम्मा ने उसे पकड़ लिया।
चैतु ने टंगिया से बिंदू के गाल, गले और सिर पर वार किए। हमले में बिंदू गंभीर रूप से घायल हो गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद भीमा सोढ़ी और कोसा सोढ़ी डरकर वहां से भाग गए। बाद में उन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी।
सिर और चेहरे पर धारदार हथियार के वार के निशान
बिंदू के शव का पोस्टमॉर्टम डॉ. टिकेंद्र देवांगन ने किया था। पोस्टमॉर्टम में सिर और चेहरे पर धारदार हथियार से चोट के निशान मिले। सिर की एक हड्डी में फ्रैक्चर था। मस्तिष्क में भी खून जमा मिला। डॉक्टर ने कोर्ट में बताया कि सिर पर धारदार और सख्त हथियार से लगी चोट के कारण ज्यादा खून बहा। इसी वजह से बिंदू की मौत हुई। डॉक्टर ने मौत को हत्या बताया।
पुलिस ने कुल्हाड़ी और कपड़े जब्त किए
वारदात के बाद पुलिस ने मौके से खून लगी मिट्टी और सामान्य मिट्टी के नमूने लिए। जांच के दौरान चैतु सोढ़ी की टी-शर्ट, लुंगी, लाल गमछा और कुल्हाड़ी जब्त की गई। कुम्मा सोढ़ी के कपड़े भी जब्त किए गए। जब्त सामान को जांच के लिए न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला, जगदलपुर भेजा गया।
15 गवाहों के बयान हुए
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 15 गवाहों के बयान कराए। पुलिस जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, गवाहों के बयान और जब्त सामान के आधार पर अभियोजन ने आरोप साबित किए। बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों को निर्दोष बताते हुए जमीन विवाद के कारण झूठा फंसाने की बात कही।
जमीन विवाद को हत्या की वजह माना
कोर्ट के अनुसार, बिंदू और आरोपियों के बीच जमीन को लेकर पहले से विवाद था। घटना भी इसी विवादित खेत में हुई थी। दोनों पक्षों के बीच पहले भी विवाद होने की बात सामने आई थी। गवाहों के बयान, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य सबूतों के आधार पर कोर्ट ने माना कि चैतु और कुम्मा ने मिलकर बिंदू पर हमला किया था। सत्र न्यायाधीश संतोष कुमार आदित्य ने दोनों को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।