आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा परिषद के चुनाव में डाक मतपत्रों की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई

Chhattisgarh Crimesआयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा परिषद के चुनाव में डाक मतपत्रों की प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। सरगुजा के कई डॉक्टरों को उनका डाक मतपत्र मिला ही नहीं, लेकिन उनके नाम के मतपत्र भरकर मतगणना के लिए राजधानी पहुंच गए।

यानी जिस मतदाता के हाथ में मतपत्र पहुंचना था, उसके पहुंचने से पहले ही उसके नाम का वोट पड़ गया। 14 प्रत्याशियों ने इसकी शिकायत की तो स्वास्थ्य विभाग ने मतगणना रोक दी। प्रत्याशियों ने मौजूदा चुनाव निरस्त कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।

राज्य में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा से जुड़े 5 हजार से ज्यादा डॉक्टर हैं। इन्हीं मतदाताओं के जरिए परिषद के पांच निर्वाचित सदस्यों का चुनाव होता है। इस बार पांच पदों के लिए 19 प्रत्याशी मैदान में हैं। परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें पांच शासन द्वारा मनोनीत, पांच पदेन अधिकारी और पांच सदस्य चुनाव के जरिए आते हैं। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पदेन सचिव सहित पदाधिकारियों के चयन में परिषद के इन सदस्यों की भूमिका होती है।

सीरियल नंबर से खुल जाएगा किसे वोट दिया? डाक मतपत्र की गोपनीयता को लेकर भी प्रत्याशियों ने सवाल उठाए हैं। मतपत्रों पर सीरियल नंबर की जो व्यवस्था अपनाई जा रही है, उससे मतगणना के बाद यह पता चलने की स्थिति बन सकती है कि किस मतदाता ने किस प्रत्याशी को वोट दिया। प्रत्याशियों की आपत्ति है कि मतदान की पहचान गोपनीय रहनी चाहिए। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया को स्पष्ट किए बिना मतगणना आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

10 सरकारी/नामित सदस्य, चुनाव से आते हैं सिर्फ पांच परिषद के 15 सदस्यों में 5 शासन द्वारा नामित और 5 पदेन सदस्य होते हैं। यानी 10 सदस्य सरकारी व्यवस्था से जुड़े हैं, जबकि डॉक्टरों के मतदान से केवल 5 सदस्य चुनकर आते हैं। अध्यक्ष का चुनाव इन्हीं 15 सदस्यों के बीच होता है। इसी वजह से अब तक अध्यक्ष पद पर सरकारी कॉलेज या नामित सदस्यों का ही दबदबा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि यह व्यवस्था अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से चली आ रही है और इसमें अब तक बदलाव नहीं हुआ।

सरगुजा में किए गए डाक मतपत्र गायब निर्वाचन प्रक्रिया में मुख्यालय से डॉक्टरों को डाक मतपत्र भेजे जाते हैं। मतदाता मतपत्र भरने के बाद उसे स्पीड पोस्ट से वापस भेजता है। विवाद इसी व्यवस्था में सामने आया है। सरगुजा के कई डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें मतपत्र मिला ही नहीं। इसके बावजूद उनके नाम से भरे हुए मतपत्र मतगणना के लिए राजधानी पहुंच गए। यानी मतपत्र मतदाता तक पहुंचने से पहले ही उसके हाथ से निकल गया और उसके नाम पर मतदान भी हो गया। यही बात इस पूरे चुनाव को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।