युमेन्द्र कश्यप/छत्तीसगढ़ क्राइम्स।छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक कैंप में सीआरपीएफ के एक सब-इंस्पेक्टर ने कथित तौर पर अपनी सर्विस गन से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। बुधवार को जारी पुलिस बयान के अनुसार, यह घटना मंगलवार को सुकमा जिले से सटे जंगल वाले इलाके में स्थित मेटागुडा कैंप में हुई। मृतक की पहचान सीआरपीएफ की 131वीं बटालियन के सब-इंस्पेक्टर देवानंद यादव के तौर पर हुई है। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने कथित तौर पर अपनी सर्विस गन से खुद को गोली मार ली। उन्होंने यह कदम क्यों उठाया, इसका कारण अभी पता नहीं चल पाया है।
कैंप में गोली चलने की आवाज सुनकर साथी जवान यादव के पास पहुंचे और उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। इसके बाद उन्हें फील्ड एम्बुलेंस से सुकमा जिले के एल्मागंडा कैंप ले जाया गया। पुलिस के बयान के अनुसार, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। यादव उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के करजहा गांव के रहने वाले थे। पुलिस ने इस संबंध में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है और घटना की परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। पुलिस ने बताया कि मंगलवार को उनके पार्थिव शरीर को उनके गांव भेजने से पहले उनका पोस्टमार्टम किया गया।
माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन के लिए दक्षिण बस्तर में सीआरपीएफ के जवानों को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है। इस साल 31 मार्च को छत्तीसगढ़ को माओवादी खतरे से मुक्त घोषित किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक पिछले आठ सालों में राज्य में लगभग 200 पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों ने आत्महत्या की है। ऐसे मामलों में पारिवारिक और निजी समस्याएं, शराब की लत और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को वजह बताया गया है।
30 सितंबर को बीजापुर के एक कैंप में छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के एक कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इससे पहले, 14 सितंबर को कांकेर जिले में सशस्त्र सीमा बल के एक हेड कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी। 8 जून को कोंडागांव जिले में छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के एक कॉन्स्टेबल ने कथित तौर पर अपने सर्विस हथियार से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। बस्तर क्षेत्र में कुल सात जिले शामिल हैं, जिनमें बीजापुर, सुकमा, कांकेर और कोंडागांव शामिल हैं।