युमेन्द्र कश्यप/मैनपुर।छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग करने के कैबिनेट के निर्णय के खिलाफ भड़के आदिवासी कांग्रेस के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष एवं बिन्द्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव ने इस निर्णय पर कड़ा विरोध एवं असंतोष व्यक्त किया है तथा मांग किया है कि विभाग का नाम पूर्ववत ही रखा जाये। छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलकर जनजाति कार्य विभाग किए जाने के निर्णय पर विवाद गहरा गया है अब इस मामले को लेकर आदिवासी समाज के नेताओ और जनप्रतिनिधियो मे नराजगी देखने को मिल रहा है।
आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और बिंद्रानवागढ़ के विधायक जनक ध्रुव ने इस फैसले को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है उन्होंने आरोप लगाया है कि यह बदलाव केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी शब्द को विलोपित करने और उनके अस्तित्व को समाप्त करने का एक गहरा षड्यंत्र है। विधायक जनक ध्रुव ने कहा कि आदिवासी पहचान हमारी संस्कृति, इतिहास और अधिकारों का प्रतीक है इस शब्द को हटाने का प्रयास समाज के अस्तित्व पर सीधा प्रहार है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री हैं, इसके बावजूद इन नेताओं को अपने ही समाज के अधिकारों से कोई सरोकार नहीं है। बैठक मे लिए गये निर्णय को पूरी तरह गलत बताते हुए श्री ध्रुव ने कहा आदिवासी अस्मिता के साथ खिलवाड़ करने वाले ऐसे फैसले को कांग्रेस पार्टी और आदिवासी समाज कतई बर्दास्त नही करेगा उन्होने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग किया है। श्री ध्रुव ने कहा कि राज्य की 75 प्रतिशत से अधिक आदिवासी जनसंख्या आज भी विकास की मुख्यधारा से कटी हुई है सरकार को आदिवासियों के मूलभूत और नीतिगत मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय नाम बदलने की क्या आवश्यकता महसूस हुई, यह समझ से परे है समाज द्वारा वर्षों से उठाए गए कई गंभीर सवाल और समस्याएं आज भी शासन स्तर पर लंबित हैं। जबकि सरकार को चाहिए की आदिवासी बहुल्य क्षेत्रो मे पुल पुलिया, सड़क, बिजली, बेहतर शिक्षा, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा रोजगार के साधन उपलब्ध कराया जाये यह सब सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय भाजपा सरकार आदिवासी शब्द को हटाने क्यो प्राथमिकता दे रही है यह समझ से परे है भाजपा सरकार आखिर किस षड़यंत्र के तहत आदिम जाति कल्याण विभाग का नाम बदलने की साजिश कर रही है। विधायक जनक ध्रुव ने दो टुक शब्दो मे कहा आदिम जाति महज एक शब्द समूह नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की वर्षों पुरानी संस्कृति और सर्वाेच्च भावना को प्रकट करता है यह शब्द आदिवासियों के मान-सम्मान, पहचान, प्रतिष्ठा और विचारधारा की आत्मा से जुड़ा हुआ है सरकार को चाहिए की इस निर्णय पर पुनः विचार करे।