छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में कैंसर पीड़ित व्यक्ति अपनी जमीन का सीमांकन कराने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है। पुराने राजस्व रिकॉर्ड में जमीन दर्ज है, लेकिन मौके पर उसकी पहचान नहीं हो पा रही है।
72 साल के कृष्णा थवाईत गले के कैंसर से पीड़ित हैं। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे इलाज के लिए रामपुर क्षेत्र में स्थित अपनी जमीन बेचना चाहते हैं। जमीन नहीं मिलने पर उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर समस्या का निराकरण करने की मांग की है।
दरअसल, मामला करीब 15 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा है। यह जमीन सड़क से लगी हुई बताई जा रही है। कृष्णा थवाईत गोपी टॉकीज के पास पान की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। पिछले कुछ समय से वे गले के कैंसर से पीड़ित हैं।
इलाज के लिए पैसों की जरूरत होने पर उन्होंने अपनी जमीन बेचने का फैसला किया, लेकिन बिक्री की प्रक्रिया के दौरान मौके पर जमीन की पहचान नहीं हो सकी। पीड़ित के भतीजे का आरोप है कि जमीन पुराने राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है, लेकिन मौके पर उसका पता नहीं चल रहा है।
2010 की चौहद्दी में जमीन, 2024 के नक्शे में नहीं दिख रही
राजस्व दस्तावेजों में खसरा नंबर 166/6 का जिक्र है। इसमें खसरा नंबर 167/4 और 167/8 से संबंधित भूमि का भी संदर्भ मिलता है। जमीन का कुल रकबा 0.127 हेक्टेयर बताया गया है।
दस्तावेजों में कृष्णालाल पिता नत्थूलाल, नीलिमा पति कन्हैयालाल, अनूप पिता कन्हैयालाल और जगन्नाथ पिता कन्हैयालाल के नाम भूमि स्वामियों के रूप में दर्ज हैं।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि साल 2010 की चौहद्दी और बाद के राजस्व रिकॉर्ड में अंतर है। पुराने अभिलेखों में जिस जमीन का उल्लेख है, वह वर्ष 2024 के नक्शे में उसी तरह दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
सीमांकन के बाद भी नहीं निकला समाधान
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पहले भी जमीन का सीमांकन कराया जा चुका है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका दावा है कि पंचनामा में भी मौके पर जमीन नहीं मिलने की बात दर्ज की गई थी। इसके बावजूद यह स्पष्ट नहीं हो सका कि रिकॉर्ड में दर्ज जमीन वास्तव में कहां स्थित है और उसका सीमांकन किस आधार पर किया जाए।
कृष्णा थवाईत के भतीजे का कहना है कि पुराने राजस्व अभिलेखों, साल 2010 की चौहद्दी, साल 2024 के नक्शे और सीमांकन रिपोर्ट की एक साथ जांच की जानी चाहिए। इससे खसरा नंबरों में हुए विभाजन, संशोधन या नक्शे में बदलाव की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पुराने और नए रिकॉर्ड की जांच की मांग
पीड़ित पक्ष ने मांग की है कि संबंधित भूमि का संयुक्त सीमांकन कराया जाए। साथ ही, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रकबे की मौके पर पहचान की जाए। यदि पुराने और नए नक्शे में कोई अंतर या रिकॉर्ड में त्रुटि मिलती है, तो नियमानुसार उसे दुरुस्त किया जाए।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
कृष्णा थवाईत ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच और समस्या का निराकरण करने की मांग की है। उनके भतीजे के मुताबिक, कलेक्टर से मुलाकात के दौरान उन्होंने तहसीलदार को प्रकरण का समाधान करने के निर्देश दिए थे।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुराने और नए राजस्व रिकॉर्ड की जांच से समस्या का समाधान निकल सकता है। फिलहाल कैंसर से पीड़ित कृष्णा थवाईत अपनी जमीन की पहचान और सीमांकन के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।