
पूरन मेश्राम/गरियाबंद। कहते हैं प्रकृति के रंग-ढंग को कोई नहीं समझ पाया। ऐसा ही एक अद्भुत और चौंकाने वाला नजारा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में देखने को मिला है।जिसने वन विभाग के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमियों को भी हैरत में डाल दिया है।
आमतौर पर महुआ के पेड़ में फूल आने का सीजन मार्च-अप्रैल का होता है।जब पूरा जंगल महुआ की महक से महक उठता है और आदिवासी समुदाय के लिए यह त्योहार जैसा होता है। लेकिन इस साल कुदरत ने अपना कैलेंडर ही बदल दिया है।
*अक्टूबर में ही खिल उठा महुआ*
यह अनोखा नजारा तौरेंगा परिक्षेत्र के ग्राम कोसुममुड़ा के जंगल का है। ग्राम पंचायत अड़गड़ी के वार्ड पंच मंगलूराम मरकाम जब अपने खेत-जंगल की ओर गए तो उन्होंने देखा कि महुआ के पेड़ में अभी से ही कोंपलें और फूल आने लगे हैं।इस दुर्लभ दृश्य को देखकर उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल में वीडियो बना लिया और अपने स्टेटस पर डाल दिया।जिसके बाद यह वीडियो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
*क्या है वजह, ग्रामीणों में कौतूहल*
ग्रामीणों में इस बात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार अक्टूबर के महीने में महुआ में फूल आते देखा है।
वही USTR सहायक संचालक जे पी दर्रो एवं पर्यावरण जानकारों के अनुसार यह जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और बदलते तापमान का असर हो सकता है। बेमौसम बारिश और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण पेड़ों का प्राकृतिक चक्र गड़बड़ा रहा है।वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इसे प्रकृति का एक शुभ संकेत भी मान रहे हैं। महुआ आदिवासी जीवन का आधार है, और असमय फूल आने को लेकर लोगों में उत्सुकता और चिंता दोनों है।
फिलहाल कोसुममुड़ा के जंगल में खिला यह महुआ का फूल पूरे तौरेंगा अंचल में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है और लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं।