नक्सलवाद के नाम पर वर्षों से दर्ज प्रकरणों की वापसी और विचाराधीन बंदियों की रिहाई का उठा मुद्दा, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तक पहुंची फरियाद

Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimes Chhattisgarh Crimesयुमेन्द्र कश्यप/गरियाबंद। छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में सरकार के प्रयासों के बीच वर्षों से नक्सलियों को सहयोग पहुंचाने के आरोप में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी समुदायों के लोगों पर दर्ज प्रकरणों और जेलों में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आया है। इसी मुद्दे को लेकर गरियाबंद जिले से न्याय, निष्पक्ष जांच और मानवीय संवेदनशीलता की मांग उठाते हुए राज्योत्सव के दौरान रायपुर प्रवास पर पहुंचे देश एवं प्रदेश के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों के समक्ष फरियाद प्रस्तुत की गई।

इस दौरान माननीय केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह, छत्तीसगढ़ के महामहिम राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री तथा छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष एवं सचिव के समक्ष विषय की गंभीरता रखते हुए वर्षों से लंबित मामलों पर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया गया।

फरियाद में प्रमुख रूप से मांग की गई कि नक्सलवाद के दौर में नक्सलियों को सहयोग पहुंचाने के आरोप में अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासियों के विरुद्ध दर्ज पुराने प्रकरणों की निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए। जिन मामलों में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं अथवा कानूनी आधार पर राहत की संभावना है, उनमें नियमानुसार प्रकरण वापसी एवं न्यायिक राहत की प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।

विशेष रूप से केंद्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध विचाराधीन बंदियों के मामलों में उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराकर न्यायसंगत निर्णय लेने, पात्र बंदियों की जमानत याचिकाओं पर शीघ्र विचार तथा विधिसम्मत आधार पर सशर्त रिहाई की पहल करने की मांग रखी गई।

इस पहल में सामाजिक कार्यकर्ता एवं एकता परिषद जनसंगठन छत्तीसगढ़ से जुड़े प्रयोग आश्रम के सीताराम सोनवानी की उपस्थिति में पीड़ित पक्ष की ओर से अपनी व्यथा और मांगें रखी गईं। साथ ही राज्य मानवाधिकार आयोग, विधिक सेवा प्राधिकरण तथा बिलासपुर, रायपुर एवं गरियाबंद के संबंधित विधिक संस्थानों से आवश्यक कानूनी सहयोग उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया।

■ न्याय की मांग, किसी के प्रति पक्षपात नहीं

इस पूरी पहल का मूल उद्देश्य स्पष्ट है कि नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई के साथ-साथ निर्दोष व्यक्तियों को न्याय मिले और किसी भी व्यक्ति को वर्षों तक विचाराधीन बंदी के रूप में अनावश्यक पीड़ा न झेलनी पड़े। कानून के शासन में दोष सिद्धि से पहले प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई, विधिक सहायता और संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।