मालकिन की मौत के बाद दाह संस्कार तक डटा रहा ये डागी, लोग देख हुए हैरान

Chhattisgarh Crimes

धमतरी। कुत्तों की वफदारी की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती है। अगर कोई डाग अपने किसी को अपना मान ले तो अपना जीवन उसके सुरक्षा और वफादारी में बीता देता है। इसका जीता जागता उदाहरण छत्‍तीसगढ़ के धमतरी में देखा गया।

दरअसल, ग्राम पेंडरवानी के प्रसिद्ध मानसलहरी और वैद्य शंकर लाल साहू की पत्नी राजबती साहू का बुधवार की रात तीन बजे निधन हुआ और सुबह से ही रिश्तेदारों और लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, तो गली का पालतू कुत्ता भी घर में आकर चुपचाप बैठ गया।

लोग उसे भगाते रहे पर नहीं गया। बाद में शव यात्रा निकली तो वह भी ग्रामीणों के साथ मुक्तिधाम तक चला गया। इस बीच भी लोगों ने उसे वापस लौटाने का प्रयास किया, लेकिन वह चलते ही रहा और शव के दाह संस्कार होते तक मुक्तिधाम में ही दाह स्थल के पास बैठे रहा।

ग्रामीण नारायण साहू, जोगूराम यादव, कामदेव साहू, गजेन्द्र साहू ने बताया कि मृतिका राजबती साहू इस कुत्ते को रोज रोटी, चावल व अन्य खाने की सामाग्री देती थी। सुबह-शाम वह घर के आसपास डटे रहता था और राजबती को भी उससे लगाव था।

शायद इसी के चलते कुत्ते में भी स्वामी भक्ति थी और वह बड़ी खामाेशी से अपनी मालकिन को नम आंखों से विदाई देते रहा। इस घटना की चर्चा शव यात्रा शुरू होने से लेकर अंतिम क्रियाकर्म तक लोग करते रहे और स्वामिभक्त कुत्ता के संबंध में अपनी-अपनी कहानियां भी बताते रहे। लोगों का कहना था कि जैसा फिल्मों में कुत्ते की स्वामी भक्ति को दर्शाया गया है, यह हकीकत ही है और आज तो यह आंखों के सामने भी दिखा।

मृतिका राजबती साहू का लगाव केवल कुत्ते तक ही सीमित नहीं था। पक्षियों के प्रति भी वह काफी संवेदनशील थी। कई सालों से रोज सुबह वह पक्षियों के लिए घर के सामने अनाज डालती थी। यह सब वह वर्षाें से कर रही थी और कुत्ते को भोजन देना तो शामिल ही है।

राजबती को खई वाली दाई (खाने-पीने की सामाग्री वाली दाई) के नाम से भी पड़ोसी व लोग पहचानते हैं। वह अपने नाते-रिश्तेदार और पड़ाेसियों, पहचान वालों को खई खाने पीने की वस्तुएं बांटती ही रहती थी। लोग इस बात को भी बराबर याद करते रहे।

Exit mobile version