बिलासपुर में देवी चित्रलेखा का कथावाचन

Chhattisgarh Crimesटेंशन लेने से कभी कोई सफल नहीं हुआ है। चाहे वह पढ़ाई हो या बिजनेस। कोई भी पढ़ाई करता है तो उद्देश्य यही होता है कि वह सफल हो। सफलता उसी को मिलती है जो अपनी जीवन में ईमानदारी के साथ 100 प्रतिशत मेहनत, परिश्रम करता है। ये बातें अपने ससुराल बिलासपुर पहुंची देवी चित्रलेखा ने युवाओं को संदेश देते हुए कहीं। वे बिलासपुर के चकरभाठा बोदरी में संत साईं लालदास के 25 वें गद्दी नशीन दिवस पर तीन दिवसीय बृज रस संवाद कथा कार्यक्रम में विभिन्न प्रसंगों पर भक्तिमय कथा सुना रही हैं। पेश है उनकी बातचीत के प्रमुख अंश…परीक्षा के दौर में बच्चे व युवा के अलावा उनके माता-पिता टेंशन से कैसे बचें?
टेंशन लेने से कभी कोई सफल नहीं हुआ है। चाहे वह पढ़ाई हो या बिजनेस। सफलता उसी को मिलती है जो अपनी जीवन में 100 प्रतिशत मेहनत, परिश्रम और सच्चाई को देता है। माता-पिता को चाहिए कि बच्चों को खूब मेहनत कराए लेकिन ज्यादा प्रेशर भी न डालें। मेहनत करो और अच्छे इंटेशन के साथ पढ़ाई करो।
आज के युवाओं में धर्म और अध्यात्म का कितना महत्व है?
बहुत महत्व है। एग्जाम या लाइफ में आज के युवा जल्दी डिप्रेस्ड हो जाते हैं। नंबर नहीं मिला, मनचाहा साथी नहीं मिला तो निराश हो गए। इससे उबरने के लिए अध्यात्म एकमात्र रास्ता है। जब आप आध्यात्मिक बनते हैं तो चीजों की गंभीरता समझ में आती है जो आपको नेगेटिव विचारों से बचाती है।
गृहस्थ में रहकर महिला का कथावाचन करना कितना चुनौतीपूर्ण है?
गृहस्थ में रहकर महिला कथावाचक बनना घर, परिवार, समाज साथ लेकर चलना चुनौतियां तो होती हैं। लेकिन इन सबके लिए भगवान की कृपा का होना जरूरी है। आपको ऐसा परिवार मिलना जरूरी है तो आपके काम के महत्व को समझे। जो मैंने बचपन से किया है। उसकी वैल्यू को ससुराल वालों ने भी समझा। उसको आगे बढ़ाने की कोशिश की, न कि रोकने की। इस वजह से संतुलन में कभी कोई परेशानी नहीं आई।
गाय को राष्ट्रमाता या राजमाता घोषित करने में इतनी देरी क्यों?
देखिए, गौमाता राष्ट्रमाता घोषित हो, इसके लिए सभी संत एकजुट है। संविधान में बदलाव लाने में थोड़ा समय लगता है। राम मंदिर बनने में ही सालों लग गए। सभी इसका आह्वान भी कर रहे है। गौ हत्या भारत के माथे पर कलंक है। हो सकता है ऊंचे पद पर बैठे लोग इसे जरूर समझेंगे। इस पर जनता जितना ज्यादा आवाज उठाएगी, उतनी जल्दी आवाज वहां तक पहुंचेगी।
बिलासपुर आपका ससुराल है। यहां और बाकी जगहों पर कथावाचन करने में क्या अनुभव रहा?
बहुत अच्छा है। यहां के लोगों का प्रेम और श्रद्धा देखने को मिली। कल पहले ही दिन पंडाल खचाखच भरा था। मेरा भी परिवार जुड़ा है। बिना कथा के भी मैं यहां आती रहती हूं।

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