छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे योग गुरु बाबा रामदेव ने देश में चल रहे आंदोलनों और युवाओं की भूमिका पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देश में न हिंदू खतरे में है, न मुसलमान, न सिख, न ईसाई। खतरे में है तो देश का बचपन, देश की जवानी, वर्तमान और भविष्य।
बाबा रामदेव ने कहा कि इस समय देश का सबसे बड़ा मुद्दा बच्चों का भविष्य बचाना है। कुछ लोग छोटे बच्चों का इस्तेमाल आंदोलनों में कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो बच्चा अभी प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहा है, आप उसे आंदोलन में धकेल देंगे तो वह पढ़ाई कब करेगा।
उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक आंदोलन जरूरी है, लेकिन आंदोलन के नाम पर अराजकता का वे समर्थन नहीं करते।
‘जब अन्याय दिखता है तो आक्रोश आंदोलन बनता है’
बाबा रामदेव ने कहा कि जब लोगों को लगता है कि कहीं बहुत ज्यादा अन्याय या अव्यवस्था हो रही है तो लोगों के भीतर आक्रोश पैदा होता है। यही आक्रोश आगे चलकर आंदोलन का रूप लेता है। लेकिन इस आक्रोश को भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए
शिक्षा-चिकित्सा व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
बाबा रामदेव ने कहा कि देश की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। इन दोनों क्षेत्रों को लेकर कई गंभीर सवाल हैं, जिनका समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें सरकारों की भी बड़ी जिम्मेदारी है। हालांकि, यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं चलती, बल्कि इसमें सभी की भूमिका होती है।
‘किसी एक व्यक्ति के सामर्थ्य में पूरी व्यवस्था बदलना नहीं’
रामदेव ने कहा कि किसी एक व्यक्ति या किसी एक पार्टी के नेता के लिए पूरी व्यवस्था को बदलना संभव नहीं है। इसके लिए समाज, राजनीति और प्रशासन के स्तर पर जागरूकता और मिलकर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि देश के सामने युवाओं, रोजगार, देश के भविष्य, प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े कई बड़े मुद्दे हैं। इन सभी समस्याओं का समाधान तभी संभव है, जब जिम्मेदारी वाले सभी लोग मिलकर काम करें और इन मुद्दों को गंभीरता से समझें।