
दोपहर करीब 12 बजे टीम जिला अस्पताल पहुंची थी। टीम में दो सदस्य शामिल थे। इंचार्ज डॉ. विनीता धुर्वे ने बताया कि टीम की ओर से MCH और एसएनसीयू की व्यवस्थाओं को देखा गया। इसके बाद अस्पताल के अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ बैठक हुई। इसमें नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा देने के लिए जरूरी बदलावों पर चर्चा की गई।
सिजेरियन की बढ़ती संख्या पर चिंता
डॉ. विनीता धुर्वे के मुताबिक, वर्तमान में सिजेरियन डिलीवरी की संख्या बढ़ रही है और नॉर्मल डिलीवरी कम हो रही है। टीम ने इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के लेबर रूम के सेटअप और काम करने के तरीके में कुछ बदलाव करने के सुझाव दिए हैं।
टीम ने बताया कि प्रसव के दौरान महिला को ज्यादा सहज और सुरक्षित महसूस कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके लिए महिला के साथ उसके पसंद के व्यक्ति को बर्थ कम्पेनियन यानी जन्म सहयोगी के रूप में रखने का सुझाव दिया गया है। इससे महिला को मानसिक रूप से सहारा मिल सकेगा और वह प्रसव के दौरान ज्यादा कंफर्टेबल रह सकेगी।
महिला खुद भी मॉनिटर कर सकेगी बच्चे की धड़कन
टीम ने अस्पताल के स्टाफ को एक और नई व्यवस्था के बारे में बताया। डॉप्लर के जरिए बच्चे की धड़कन जांचने की प्रक्रिया महिला को भी सिखाने का सुझाव दिया गया है। इससे महिला खुद भी बच्चे की धड़कन के बारे में जानकारी ले सकेगी और स्टाफ को बता सकेगी।
महिलाओं की प्राइवेसी को लेकर भी टीम ने बदलाव के सुझाव दिए। वर्तमान में लेबर वार्ड में पर्दों के जरिए प्राइवेसी दी जाती है। टीम ने पर्दों की जगह पार्टिशन लगाने की सलाह दी, ताकि हर महिला के लिए अलग स्पेस बनाया जा सके।
टेबल की जगह बेड पर आरामदायक पोजीशन में डिलीवरी
टीम ने प्रसव के दौरान महिलाओं को उनकी सुविधा के अनुसार पोजीशन देने पर जोर दिया। डिलीवरी के लिए केवल एक तय व्यवस्था के बजाय महिला जिस पोजीशन में खुद को आरामदायक महसूस करे, उसी के अनुसार प्रसव कराने का सुझाव दिया गया है। इसके लिए टेबल की जगह बेड का इस्तेमाल करने की बात भी कही गई।
टीम ने अनावश्यक इंडक्शन नहीं करने की सलाह दी। साथ ही महिलाओं को प्रसव के दौरान एक्सरसाइज कराने के लिए बर्थिंग बॉल रखने का सुझाव दिया गया। इससे महिला को अपनी सुविधा के अनुसार मूवमेंट और एक्सरसाइज करने में मदद मिलेगी।
प्लेसेंटा निकलने के बाद ऑक्सीटोसिन लगाने का सुझाव
प्रसव के बाद ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल को लेकर भी टीम ने स्टाफ को जानकारी दी। टीम ने सुझाव दिया कि डिलीवरी के बाद प्लेसेंटा निकलने के बाद ऑक्सीटोसिन दिया जाए। इसके अलावा प्रसव के दौरान महिलाओं को रिलैक्स रखने के लिए म्यूजिक चलाने का सुझाव भी दिया गया। टीम के मुताबिक, इससे महिला को आराम महसूस हो सकता है और प्रसव की प्रक्रिया में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ी टीम ने ली क्लास के
डॉ. विनीता धुर्वे ने बताया कि टीम स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ी है और सरकारी स्तर पर इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है। टीम ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ की क्लास लेकर नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा देने के तरीके समझाए।
निरीक्षण के दौरान MCH यूनिट के साथ एसएनसीयू की व्यवस्थाओं की भी जानकारी ली गई। टीम ने अस्पताल प्रबंधन को आगे की प्लानिंग और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए जरूरी सुझाव दिए हैं।