
हादसे के बाद घायल गौवंश सड़क किनारे घंटों तड़पते रहे। स्थानीय लोगों और गौसेवकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन तत्काल मदद नहीं मिल सकी।
स्थानीय लोगों ने मदद के लिए ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों से संपर्क करने की कोशिश की। आरोप है कि सरपंच और सचिव ने फोन नहीं उठाया। वहीं, NHAI की ओर से वाहन उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, देर रात नेशनल हाईवे पर भारी वाहन तेज रफ्तार से चलते हैं। उनकी गति पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है। सड़क पर घूमने वाले मवेशियों को हटाने के लिए भी ठोस व्यवस्था नहीं होने से लगातार हादसे हो रहे हैं।
पहले भी 11 मवेशियों को कुचल चुके हैं भारी वाहन
कुछ समय पहले दर्री मुख्य मार्ग पर भी 11 मवेशी भारी वाहन की चपेट में आ गए थे। इनमें कई मवेशियों की मौत हो गई थी। घटना के बाद गौसेवकों ने विरोध प्रदर्शन भी किया था, लेकिन इसके बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
हादसे के बाद व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि नेशनल हाईवे पर हादसे के बाद घायल या मृत पशुओं को हटाने की तत्काल व्यवस्था क्यों नहीं है। घायल मवेशियों को घंटों तक सड़क किनारे तड़पते रहने की स्थिति व्यवस्था की लापरवाही पर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों और गौसेवकों ने संभाली जिम्मेदारी
जब जिम्मेदार विभागों और पंचायत स्तर से तत्काल मदद नहीं मिली, तो स्थानीय ग्रामीणों और गौसेवकों को ही आगे आना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सड़क हादसा नहीं, बल्कि पशुओं की सुरक्षा और जिम्मेदार विभागों की व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।