
बैठक में निर्देश दिए गए कि रात में डीजे और साउंड सिस्टम बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पुलिस ने कहा कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक ध्वनि बढ़ाने वाले यंत्रों और वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। दिन में भी आवाज तय सीमा से ज्यादा होने पर कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस ने संचालकों को बताया कि सार्वजनिक जगहों पर ध्वनि विस्तारक यंत्र की आवाज आसपास के सामान्य शोर से 10 इकाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। साथ ही आवाज 75 इकाई से ऊपर भी नहीं जा सकती। दोनों में जो सीमा कम होगी, वही मान्य होगी।
इसका मतलब यह है कि केवल कानों को तेज लगने वाली आवाज ही समस्या नहीं होगी, बल्कि तय माप के आधार पर भी ध्वनि की जांच की जा सकती है। इसी वजह से संचालकों को अपने साथ आवाज मापने वाला यंत्र रखने के निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल और स्कूल के आसपास ज्यादा सावधानी
पुलिस ने अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, न्यायालय और सरकारी कार्यालयों के आसपास भी विशेष सावधानी बरतने को कहा है। इन जगहों की 100 मीटर की सीमा को शांत क्षेत्र माना जाएगा। यहां तेज आवाज में डीजे या दूसरे ध्वनि यंत्र चलाने पर नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
पुलिस ने यह भी साफ किया कि वाहनों पर ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाकर उनका इस्तेमाल नहीं किया जाए। त्योहारों के दौरान जुलूस या अन्य आयोजनों में सड़क पर चलते वाहन से तेज आवाज निकालने की परंपरा पर भी रोक रहेगी।
पंडाल के लिए सड़क नहीं घेर सकेंगे
पंडाल लगाने वालों के लिए भी इस बार नियम पहले ही तय कर दिए गए हैं। पुलिस ने कहा कि पंडाल सफेद निशान के पीछे ही लगाया जाएगा। मुख्य सड़क, लोगों के आने-जाने का रास्ता और आपातकालीन रास्ता किसी भी हालत में बंद नहीं होना चाहिए।
पंडाल लगाने से पहले नगर निगम और संबंधित विभागों से जरूरी अनुमति लेना भी अनिवार्य होगा। इसके अलावा आग से बचाव और बिजली की सुरक्षा की जांच कराने के बाद ही आयोजन करने के निर्देश दिए गए हैं। पंडाल में कितने लोग आ सकते हैं और उसकी बनावट सुरक्षित है या नहीं, इसकी भी जांच करानी होगी।
नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करने की तैयारी
बैठक में संचालकों को बताया गया कि ये निर्देश सिर्फ त्योहारों के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं हैं, बल्कि अदालत और शासन के पहले से तय नियमों का हिस्सा हैं। पुलिस ने उच्च न्यायालय के 20 नवंबर 2023 के आदेश और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन करने को कहा।