छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नवागांव में धर्मांतरित महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। ग्रामीणों और समाज के लोगों ने परिवार पर धर्म परिवर्तन कर गांव की परंपराओं से अलग रहने का आरोप लगाया। कई घंटे चली बैठक के बाद परिवार ने समाज के साथ रहने और महिला का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई।
इसके बाद ग्रामीणों ने परिवार के सदस्यों के पैर धोए। गंगाजल पिलाया, तुलसी पत्र खिलायाऔर तिलक लगाकर प्रसाद बांटा। मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद महिला का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया।
मृतका पियन साहू (55) के भाई उमेश साहू ने बताया कि उनका परिवार करीब 8 साल से ईसाई मिशनरी से जुड़ा था। अब परिवार ने आगे समाज के साथ रहने की बात कही है। मामला सिहावा थाना क्षेत्र का है।
अब जानिए पूरा मामला
नवागांव की रहने वाली पियन साहू का गुरुवार को निधन हो गया था। पियन बाई तलाकशुदा थी और भाई के साथ रहती थी। परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की, लेकिन ग्रामीणों और समाज के लोगों ने कहा कि अंतिम संस्कार गांव और समाज की परंपरा के अनुसार किया जाना चाहिए।
धर्म परिवर्तन का लगाया आरोप
ग्रामीणों और समाज के लोगों का आरोप था कि मृतका का परिवार पिछले कुछ सालों से ईसाई मिशनरी से जुड़ा हुआ था और समाज के रीति-रिवाजों के अनुसार होने वाले कार्यक्रमों में शामिल नहीं होता था। इसी वजह से अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की स्थिति बनी।
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में किसी की मौत होने पर पूरा समाज अंतिम संस्कार की तैयारी में सहयोग करता है। लकड़ी समेत अन्य जरूरी सामान जुटाने के साथ समाज के लोग भी अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं।
ग्रामीणों का कहना था कि यह परिवार समाज से अलग रहता था, इसलिए अंतिम संस्कार में सहयोग को लेकर विवाद हुआ।
कई घंटे की बैठक के बाद बनी सहमति
विवाद बढ़ने के बाद सरपंच, ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष और समाज के प्रमुख लोगों ने परिवार से बातचीत की। बैठक में परिवार की ओर से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार करने पर सहमति जताई गई।
परिवार ने यह भी कहा कि आगे से वह गांव और समाज के कार्यक्रमों में शामिल होगा। इसके बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों की मौजूदगी में महिला का हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।
परिवार का शुद्धिकरण कराया गया
सहमति बनने के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने परिवार को समाज में दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया पूरी की। गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना कराई गई। इसके बाद नारियल फोड़ा गया, प्रसाद खिलाया गया और गंगाजल का छिड़काव किया गया। परिवार के सदस्यों को तुलसी का पत्ता भी खिलाया गया।