
प्रदर्शनकारी शांति घाट से करीब 10 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारी राशन-पानी के साथ पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव में वो लोग रहते हैं वहां के हालात नरक से भी ज्यादा बदहाल है। वे लोग सिर्फ भगवान भरोसे जी रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए हरसंभव प्रयास किया। नगरी और आसपास के पेट्रोल पंपों को दोपहर 1 बजे तक बंद कर दिया और डीजल देने पर रोक लगा दी गई। लेकिन प्रदर्शनकारी धमतरी की ओर बढ़े।
बनरौद के पास पुलिस-प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए सड़क पर बैरिकेड लगा दिए और बीच सड़क में ट्रक खड़े कर दिए। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े, लेकिन प्रदर्शनकारियों को रोकने में नाकाम रहे।प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कुछ मांगों को तुरंत पूरा करने और कुछ मांगों को जल्द ही पूरा करने का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीण अपने-अपने गांव लौटे।
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, धमतरी में सोमवार को वनांचल क्षेत्र के करीब 45 गांवों के हजारों आदिवासी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल-पुलिया, बिजली और 7 बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। ये प्रदर्शनकारी जल- जंगल-जमीन संघर्ष समिति धमतरी-गरियाबंद के बैनर तले एकजुट हुए थे।
सोमवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे नगरी ब्लॉक में बड़ी संख्या में आदिवासी एकत्र हुए। इनमें महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा शामिल थे। सभी अपनी मांगों को लेकर धमतरी कलेक्ट्रेट का घेराव करने निकले। ग्रामीणों का कहना था कि वे सालों से सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।
350 से ज्यादा का पुलिस बल बुलाया गया
इधर, प्रदर्शन को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग सतर्क रहा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए रायपुर रेंज से करीब 350 से ज्यादा का पुलिस बल बुलाया गया था। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के क्षेत्रों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई, साथ ही बैरिकेडिंग कर आवाजाही को कंट्रोल किया गया।
प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े। हालांकि, पुलिस प्रदर्शनकारियों को रोकने में नाकाम रही।करीब दोपहर साढ़े 12 बजे हजारों की संख्या में ग्रामीण शांति घाट पहुंचे। यहां वे पैदल मार्च करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से होकर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ गए। रास्ते भर वे अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे।प्रदर्शनकारियों के हाथों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीरें थीं और वे अपने अधिकारों की मांग कर रहे थे।