छत्तीसगढ़ में अब कैंसर के हर केस की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पास होगी

यह व्यवस्था केवल सरकारी अस्पतालों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि निजी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, पैथोलॉजी और हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर, पेलिएटिव केयर संस्थान और कैंसर रोग से जुड़े मामलों की देखभाल करने वाले एनजीओ भी इसके दायरे में होंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।

इसके अनुसार कैंसर के मामलों की संख्या की निगरानी और व्यवस्थित डेटा संग्रह के लिए रिपोर्टिंग जरूरी है। अब तक कैंसर रजिस्ट्री में मामलों की जानकारी काफी हद तक स्वैच्छिक रिपोर्टिंग पर निर्भर थी। सरकार का मानना है कि सभी डायग्नोस्ड मामलों की जानकारी मिलने से कैंसर की शुरुआती पहचान, इलाज और नियंत्रण के लिए बेहतर योजना बनाई जा सकेगी।

यदि किसी मरीज में कैंसर का संदेह होता है तो इलाज करने वाले डॉक्टर की जिम्मेदारी होगी कि उसे जांच और पुष्टि के लिए भेजा जाए। कैंसर की पुष्टि होने के बाद पैथोलॉजिस्ट को निर्धारित ‘कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म’ भरना होगा। यह जानकारी बीमारी का पता चलने के अधिकतम एक महीने के भीतर सौंपना अनिवार्य होगा।

सरकार को मिलेगा कैंसर का वास्तविक डेटा : कैंसर अधिसूचित रोग घोषित होने से राज्य में कैंसर की घटनाओं, प्रसार, मृत्यु दर और बीमारी के प्रभाव में होने वाले बदलावों की निगरानी की जा सकेगी। साथ ही कैंसर स्क्रीनिंग और इलाज की सुविधाओं की प्रभावशीलता का मूल्यांकन होगा।

इस डेटा का इस्तेमाल कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण, उपचार सुविधाएं विकसित करने तथा कैंसर अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने के लिए नीति बनाने में किया जाएगा।

इन संस्थानों को रिपोर्ट करना होगा

  • सरकारी और निजी अस्पताल व डिस्पेंसरी
  • सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेज
  • पैथोलॉजी व हेमेटोलॉजी लैब
  • सरकारी, निजी और कॉर्पोरेट इमेजिंग सेंटर
  • अन्य अस्पताल व चिकित्सा संस्थान, इनमें आयुर्वेद और यूनानी संस्थान भी शामिल
  • कैंसर देखभाल करने वाले एनजीओ

राज्य में मुंह का कैंसर सबसे बड़ा खतरा

  • ओरल कैंसर सबसे आगे: 2024-25 में जनवरी तक 15.16 लाख लोगों की ओरल कैंसर जांच हुई, जबकि ब्रेस्ट कैंसर के लिए 7.55 लाख और सर्वाइकल कैंसर के लिए 7.21 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई।
  • विशेष जनजातियों में भी केस: कमार और बैगा समुदाय की लगभग 25 हजार महिलाओं की जांच में 298 आशंकित (स्तन-108, मुख-104, गर्भाशय-86) मरीज पाए गए।
  • जिला अस्पतालों में कीमो: 2023-24 में राज्य के 18 जिला अस्पतालों में ही 2,404 मरीजों को कीमोथेरेपी दी गई, जिससे मरीजों को बड़े शहरों के चक्कर काटने से राहत मिली है।
  • हर केस ​की रिपोर्टिंग से यह असर : अब तक 15 लाख से अधिक स्क्रीनिंग के बाद भी कई संदिग्ध मरीज फॉलो-अप जांच कराने या प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने के दौरान सरकारी डेटा से छूट जाते थे। कैंसर के ‘अधिसूचित रोग’ बनने से अब स्क्रीनिंग से लेकर बायोप्सी और कीमोथेरेपी तक-हर मरीज की ट्रैकिंग एक सिंगल डिजिटल आईडी से संभव हो सकेगी।