
बीजापुर के आदिवासी युवाओं को कैमरा ट्रैप, जीपीएस ट्रैकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य वन भैंसों की सुरक्षा मजबूत करना, वैज्ञानिक डेटा जुटाना और स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ना है।
दरअसल, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में छत्तीसगढ़ के राजकीय पशु वन भैंसा के संरक्षण के लिए शुरू की गई ‘वन भैंसा मित्र’ पहल स्थानीय समुदाय को संरक्षण गतिविधियों से जोड़ रही है। इस पहल के तहत आदिवासी युवाओं को संरक्षण कार्यों का हिस्सा बनाया गया है। दावा है कि इससे एक ओर वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होगी, वहीं दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी तैयार होंगे।
पश्चिम और मध्य भारत में शुद्ध नस्ल के वन भैंसों का सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास इंद्रावती टाइगर रिजर्व माना जाता है। यह प्रजाति अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की संकटग्रस्त प्रजातियों की सूची में शामिल है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत इसे सर्वोच्च कानूनी संरक्षण प्राप्त है। इसके बावजूद लगातार घटती संख्या चिंता का विषय बनी हुई है। मौजूदा अनुमान के मुताबिक रिजर्व क्षेत्र में 10 से 15 वन भैंसों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
वैज्ञानिक निगरानी के लिए कैमरा, GPS और AI का इस्तेमाल
साल 2025 में वन विभाग, नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी, वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) और हैदराबाद स्थित तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने मिलकर ‘वन भैंसा मित्र’ कार्यक्रम शुरू किया। इसके तहत रिजर्व क्षेत्र के आसपास रहने वाले युवाओं को 6 महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
प्रशिक्षण में कैमरा ट्रैप लगाना, जीपीएस आधारित लोकेशन ट्रैकिंग, वन्यजीवों की गतिविधियों का दस्तावेजीकरण और AI आधारित डेटा विश्लेषण शामिल है। युवाओं को वैज्ञानिक तरीके से वन्यजीव संरक्षण का हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि वे सिर्फ निगरानीकर्ता नहीं बल्कि संरक्षण सहयोगी के रूप में काम कर सकें।
मल और जैविक नमूनों से होगी पहचान और निगरानी
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आनुवंशिक अध्ययन भी है। प्रशिक्षित युवा वन भैंसों के मल और अन्य जैविक नमूने एकत्र करेंगे, जिनकी प्रयोगशालाओं में जांच की जाएगी। इस प्रक्रिया से वन भैंसों की शुद्धता, स्वास्थ्य स्थिति, संख्या और उनके प्रजनन पैटर्न से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इससे भविष्य की संरक्षण रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।
क्या कहते हैं अफसर?
इंद्रावती टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर स्टाइलो मंडावी ने कहा कि, अगर इस पहल को लगातार वैज्ञानिक सहयोग मिलता रहा तो इंद्रावती टाइगर रिजर्व देश में कम्युनिटी आधारित संरक्षण का एक मॉडल बन सकता है। स्थानीय युवाओं की भागीदारी वन भैंसा संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत साबित होगी।