
यहां अध्यक्ष बनाए जाने के करीब ढाई महीने बाद भी उन्होंने एम्स में अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है और न ही छत्तीसगढ़ आकर पदभार संभाला है। नतीजा यह कि जिस परिषद को राज्य में पैरामेडिकल शिक्षा और प्रोफेशनल्स के लिए पहली बार नियामक व्यवस्था शुरू करनी थी, उसका काम अब तक शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में परिषद के गठन को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने 14 जुलाई को छत्तीसगढ़ राज्य पैरामेडिकल एवं हेल्थ केयर प्रोफेशनल परिषद के गठन की घोषणा की थी। इसी घोषणा के साथ परिषद के चेयरपर्सन और सदस्यों के नाम भी तय कर दिए गए थे। एम्स नई दिल्ली के मुख्य फिजियोथेरेपिस्ट अविनाश बाबूराव धारगावे को परिषद का अध्यक्ष बनाया गया। लेकिन घोषणा के बाद से अब तक उन्होंने यहां आकर अपना पदभार ग्रहण नहीं किया है। पड़ताल में पता चला है कि उन्होंने वहां से त्यागपत्र ही नहीं दिया है। क्योंकि उनका रिटायरमेंट करीब है। इस वजह से वे त्यागपत्र नहीं दे रहे हैं। इधर अध्यक्ष के पदभार नहीं संभालने के कारण इसके चलते छत्तीसगढ़ में परिषद की औपचारिक काम भी शुरू नहीं हो सका है।
निजी कॉलेजों की मनमानी रोकने किया गया गठन नई परिषद का गठन इसलिए किया गया है ताकि राज्य में पैरामेडिकल और एलाइड हेल्थ से जुड़े पाठ्यक्रमों और संस्थानों की निगरानी के लिए पहली बार वैधानिक व्यवस्था हो। अब तक इन प्रोफेशन के लिए अलग राज्य स्तरीय नियामक परिषद नहीं थी। परिषद को पैरामेडिकल एवं एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स का राज्य स्तरीय पंजीयन करने, संस्थानों का निरीक्षण करने और राष्ट्रीय स्तर पर तय मानकों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जानी है। कॉलेजों में पर्याप्त फैकल्टी, लैब, उपकरण और प्रशिक्षण सुविधाएं हैं या नहीं, इसकी निगरानी भी इसी व्यवस्था के तहत होनी है। इसके अलावा पाठ्यक्रम और सीटों की मान्यता, संस्थानों के पंजीयन, प्रोफेशनल आचार संहिता और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएं भी परिषद के जरिए लागू की जानी हैं।
परिषद बनने से क्या बदलेगा? पैरामेडिकल और हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स का कोर्स करने वाले छात्रों का राज्य स्तर पर रजिस्ट्रेशन होगा। {कॉलेजों और संस्थानों की नियमित जांच की जा सकेगी। {पढ़ाई के लिए जरूरी फैकल्टी, लैब, उपकरण और प्रशिक्षण की सुविधा देखी जाएगी। {कोर्स और सीटों की मान्यता की निगरानी होगी। अभी मनमर्जी से प्रवेश दिए जा रहे। {नियमों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों पर कार्रवाई हो सकेगी। इससे नियमों का पालन होगा। {प्रोफेशनल्स के लिए आचार संहिता लागू की जा सकेगी।