भिलाई के बहुचर्चित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट को लेकर अब स्थिति साफ हो गई

Chhattisgarh Crimesभिलाई के बहुचर्चित कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) प्लांट को लेकर अब स्थिति साफ हो गई है। जामुल और कुरुद में विरोध के बाद तीसरी जगह के रूप में चिन्हित ग्राम खेरधा में ही प्लांट स्थापित किया जाएगा। नगर पालिक निगम भिलाई के अनुसार खेरधा में आवंटित 7.5 एकड़ जमीन पर बीपीसीएल ने चारों तरफ घेरा कार्य पूरा कर लिया है। अब प्लांट का निर्माण कार्य अतिशीघ्र शुरू किया जाएगा। स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद परियोजना के लिए खेरधा की जमीन में कोई बदलाव नहीं किया गया है।यह परियोजना छत्तीसगढ़ में सतत योजना के तहत नगरीय ठोस अपशिष्ट से जैव ईंधन तैयार करने की योजना का हिस्सा है। छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के प्रयासों के बाद 13 मार्च 2024 को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव की मौजूदगी में नगर पालिक निगम रायपुर-भिलाई, सीबीडीए और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड के बीच सीबीजी संयंत्रों की स्थापना के लिए त्रिपक्षीय एमओयू हुआ था।

इसके बाद नगर पालिक निगम भिलाई, सीबीडीए और बीपीसीएल के बीच त्रिपक्षीय कंसेशन एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए गए। समझौते के तहत भिलाई निगम क्षेत्र के खेरधा में बीपीसीएल अपने निवेश से संयंत्र स्थापित करेगा। यहां केवल भिलाई का ही नहीं, बल्कि आसपास के नगरीय निकायों से निकलने वाले जैविक कचरे का भी उपयोग किया जाएगा।

रोज 150 टन जैविक कचरे से बनेगा 12-15 टन ईंधन निगम आयुक्त सुरुचि सिंह के मुताबिक प्रस्तावित संयंत्र में भिलाई, दुर्ग, रिसाली, भिलाई-चरोदा नगर निगम, कुम्हारी और जामुल नगर पालिका तथा उतई नगर पंचायत से प्राप्त होने वाले जैविक अपशिष्ट का उपयोग किया जाएगा। परियोजना की क्षमता करीब 150 मीट्रिक टन जैविक अपशिष्ट प्रतिदिन के उपयोग की है। इससे प्रतिदिन करीब 12 से 15 मीट्रिक टन कंप्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन होने का अनुमान है।

बीपीसीएल वहन करेगा पूरा खर्च इस प्लांट में होने वाला करीब 60 करोड़ रुपए का निवेश बीपीसीएल द्वारा स्वयं किया जाएगा। परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 30 हजार मानव दिवस प्रतिवर्ष रोजगार सृजित होने की बात निगम ने कही है। निगम के अनुसार संयंत्र की पूर्ण क्षमता पर उत्पादन और बिक्री होने की स्थिति में प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ रुपए का जीएसटी प्राप्त हो सकता है।

तीन जगह बदली, हर जगह हुआ विरोध बायो गैस प्लांट की स्थापना को लेकर पिछले दो वर्षों में तीन स्थान सामने आए। शुरुआती प्रस्ताव जामुल ट्रेंचिंग ग्राउंड के पास था। स्थानीय लोगों ने रिहायशी क्षेत्र के नजदीक प्लांट लगाए जाने पर बदबू, भारी वाहनों की आवाजाही और प्रदूषण की आशंका जताते हुए विरोध किया। इसके बाद प्रशासन ने कुरुद में जमीन का विकल्प तलाशा। कुरुद में 29 जनवरी 2025 से महिलाओं ने विरोध शुरू किया। करीब दस दिन तक चले धरने के बाद चक्काजाम भी किया गया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि वे विकास के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वार्ड में सीबीजी प्लांट नहीं लगाया जाए। विरोध के बाद यहां भी प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

खेरधा में भी हुआ था विवाद इसके बाद खेरधा में 7.5 एकड़ जमीन आवंटित की गई। जुलाई में यहां बाउंड्री वॉल के लिए काम शुरू कराने की कोशिश के दौरान ग्रामीणों ने विरोध किया था। ग्रामीणों ने जमीन को सामुदायिक चारागाह बताते हुए पंचायत की अनुमति और एनओसी सहित अन्य मुद्दे उठाए थे। इसके बावजूद अब निगम ने स्पष्ट किया है कि परियोजना के लिए खेरधा की जमीन ही तय है और BPCL ने जमीन की चारदीवारी का काम पूरा कर लिया है। ऐसे में अब करीब ढाई साल पहले शुरू हुई इस परियोजना के निर्माण की प्रक्रिया खेरधा में आगे बढ़ने जा रही है।

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