सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों को स्कूल के माहौल में सहज बनाने और पढ़ाई के प्रति रुचि विकसित करने के लिए इस सत्र से 3 महीने का रेडीनेस प्रोग्राम चलाया जाएगा। इसके तहत बच्चों को खेल आधारित गतिविधियों के माध्यम से बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान कराया जाएगा। इसके लिए एससीईआरटी ने विशेष मॉड्यूल तैयार किया है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, पहली बार स्कूल आने वाले कई बच्चों को नए माहौल में ढलने में समय लगता है। ऐसे में वे पढ़ाई में रुचि नहीं ले पाते और शुरुआती कक्षाओं में ही पिछड़ जाते हैं।
कई अध्ययनों में यह सामने आया है कि जो बच्चे शुरुआती स्तर पर भाषा और गणित की बुनियादी समझ विकसित नहीं कर पाते, वे आगे की कक्षाओं में भी सीखने में कठिनाई महसूस करते हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए रेडीनेस प्रोग्राम शुरू किया गया है।रेडीनेस प्रोग्राम के तहत शिक्षक कविता, कहानी, हाव-भाव, पशु-पक्षियों की आवाज, चित्र पहचान, रंग भरना, बिंदु मिलाना, चित्रों का मिलान, कागज चिपकाना और अंक पहचान जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करेंगे। उद्देश्य यह है कि बच्चे बिना किसी तनाव के खेल-खेल में सीखें और स्कूल से जुड़ाव महसूस करें।
शिक्षकों को भी दिया गया विशेष प्रशिक्षण
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत कक्षा पहली के लिए तीन महीने के खेल आधारित रेडीनेस मॉड्यूल का प्रावधान किया गया है। इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कक्षा पहली पढ़ाने वाले शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है।
साल के अंत तक बुनियादी दक्षता का लक्ष्य
नई शिक्षा नीति के अनुसार, इस साल के अंत तक प्रदेश के बच्चों में शत-प्रतिशत बुनियादी भाषा और गणितीय कौशल विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कक्षा तीन के विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का आकलन भी किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि पहली कक्षा में मजबूत आधार बनने से आगे की पढ़ाई आसान होगी और बच्चों का सीखने का स्तर बेहतर होगा।