
आरोप है कि एजेंसियों ने अतिरिक्त भुगतान की रकम निकालकर उसका एक हिस्सा अधिकारियों और कथित सिंडिकेट तक नकद कमीशन के रूप में पहुंचाया। इस मामले में तत्कालीन सीएसएमसीएल प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी, तत्कालीन डिप्टी एमडी नवीन प्रताप सिंह तोमर, कारोबारी अनवर ढेबर और मैनपावर एजेंसियों के संचालकों की भूमिका सामने आई है। ईओडब्ल्यू ने जांच पूरी कर बुधवार को अंतिम चार्जशीट पेश की। इसमें 13 अधिकारी, कर्मचारी और कारोबारियों को आरोपी बनाया गया है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, वर्ष 2019 में मैनपावर एजेंसियों के टेंडर की शर्तों में बदलाव किया गया। नियमित वेतन के अलावा ओवरटाइम, बोनस और हॉलीडे-पे के भुगतान का प्रावधान जोड़ा गया। आरोप है कि एजेंसियों ने कर्मचारियों के नाम पर इन मदों में अतिरिक्त भुगतान के बिल प्रस्तुत किए, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं दिया। सीएसएमसीएल से मिली रकम का इस्तेमाल कथित तौर पर कमीशन भुगतान और एजेंसियों को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाने में किया गया।
अरुणपति के कार्यकाल में 152.40 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान आईटीएस अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 16 अप्रैल 2023 तक सीएसएमसीएल के प्रबंध संचालक रहे। ईओडब्ल्यू के मुताबिक, इस दौरान पांच मैनपावर एजेंसियों को 152.40 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इसमें 82.66 करोड़ रुपए ओवरटाइम, 45.01 करोड़ रुपए हॉलीडे-पे, 12.20 करोड़ रुपए बोनस और 12.50 करोड़ रुपए सर्विस चार्ज के नाम पर दिए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर कमीशन वसूली की व्यवस्था बनाई गई। एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपए तक कमीशन वसूलने का आरोप है। इनमें सुमीत फैसिलिटीज से करीब 15.65 करोड़ रुपए वसूलने के साक्ष्य मिलने की बात कही गई है।