
योजना स्वीकृत होने पर लागत का 25 प्रतिशत केंद्र सरकार देगा। 75 प्रतिशत फंड निकायों को अपने स्रोत से जुटाने होंगे। इसके लिए उन्हें बैंकों से लोन लेना होगा। बांड जारी कर लोगों से पैसे लिए जा सकते हैं। या फिर पीपीपी मॉडल में निजी निवेशकों को आकर्षित किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ में रायपुर नगर निगम को छोड़कर शेष 13 नगर निगम और अन्य पालिका व पंचायत आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है।
रायपुर निगम का सालाना राजस्व 300 करोड़ के करीब है। कर्मचारियों-अधिकारियों की तनख्वाह और सामान्य खर्च की भरपाई निगम खुद के राजस्व से कर लेता है। बिलासपुर निगम की पिछले वित्तीय वर्ष में राजस्व 131 करोड़ रहा। शेष निगमों का राजस्व इससे भी कम है। यहां अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए तनख्वाह बांटने के लिए भी खुद का राजस्व पूरा नहीं पड़ता।
आर्थिक रूप से मजबूत होने के बावजूद रायपुर नगर निगम पिछले ढाई साल से ग्रीन बांड जारी करने के लिए संघर्ष कर रहा है। रायपुर निगम कमिश्रर संबित मिश्रा ने कार्यशाला में बताया कि बांड के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मिल गई है। प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जल्द ही हम बांड ला रहे हैं।
कार्यशाला के दौरान दो एमओयू हुए
1. हुडको और राज्य सरकार के बीच: इस एमओयू में प्रदेश का कोई भी नगरीय निकाय योजना के तहत योजना की स्वीकृति प्राप्त करता है तो उस योजना के लिए हुडको का सहयोग लिया जा सकता है। इसमें लोन के अलावा अन्य वित्तीय मॉडल पर सहयोग लिया जा सकता है।
2. सेप्ट यूनिवर्सिटी हैदराबाद: राज्य सरकार और सेप्ट यूनिवर्सिटी के बीच तकनीकी सहयोग के लिए एमओयू हुआ है। इसमें मुख्य रूप से ई-बस के संचालन और इसी तरह योजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी सलाह ली जा सकेगी।
1 लाख करोड़ के अर्बन चैलेंज फंड का लाभ उठाएं निकाय: साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बुधवार को नगरीय प्रशासन विभाग और आवास एवं शहरी विकास निगम (हुडको) की ओर से नवा रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि छत्तीसगढ़ के शहरों का विकास आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सुनियोजित, समावेशी और टिकाऊ बनाया जाना चाहिए।
शहरों को निवेश, उद्योग, व्यापार और रोजगार का केंद्र बनाने के लिए नगरीय निकाय गुणवत्तापूर्ण और आर्थिक रूप से व्यवहार्य परियोजनाएं तैयार करें। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप प्रदेश ने भी विकसित छत्तीसगढ़ का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया है।
शहरों में जलभराव का स्थायी समाधान, बेहतर जल निकासी, पेयजल, सड़क, बिजली और स्वच्छता की दीर्घकालिक योजना जरूरी है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड से शहरों को विकास का अवसर मिलेगा। परियोजनाओं के निर्माण के साथ संचालन, रखरखाव और वित्तीय व्यवहार्यता भी सुनिश्चित करनी होगी।
केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने कहा कि निकाय बैंक वित्तपोषण, बाजार आधारित संसाधनों और सार्वजनिक-निजी भागीदारी से भी धन जुटाएं। कार्यशाला में प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, हुडको के सीएमडी संजय कुलश्रेष्ठ, तेलंगाना नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव डॉ. टीके श्री देवी, सेप्ट विश्वविद्यालय के प्रेसिडेंट बरजोर मेहता, विभागीय संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर और सुडा के सीईओ सुमित अग्रवाल आदि उपस्थित थे।