
प्रदर्शनकारी हाथों में वार्डों के नाम की तख्तियां लेकर पहुंचे थे। वे अधिकारियों को बाहर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। अधिकारी नहीं आए तो वार्डवासी और पार्षद महापौर के चेंबर में पहुंच गए। यहां उन्होंने महापौर के सामने गंदे पानी का गिलास रखा और कहा कि अगर वे यह पानी पीते हैं तो उनके साथ फोटो खिंचवाएंगे। इसके बाद प्रदर्शनकारी गंदे पानी का गिलास लेकर आयुक्त के पास पहुंचे और उन्हें भी पानी पीने की चुनौती दी। साथ ही साफ पानी की सप्लाई शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
वार्डवासियों ने बताया कि दूषित पानी की वजह से उनके परिवार के लोग बीमार हो रहे हैं। करीब एक हफ्ते से कुछ परिजन बीमार हैं और उन्हें दो बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। उनके मुताबिक, उल्टी-दस्त और बुखार से करीब 5 से 6 लोग परेशान हैं। प्रदर्शनकारियों ने पानी की वजह से कुछ लोगों की मौत होने का भी दावा किया।
जोधपुर वार्ड की पार्षद सुमन मेश्राम ने कहा कि उनके वार्ड में एक महीने से ज्यादा समय से गंदा पानी आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयुक्त को फोन करने पर आजकल कहकर टाल दिया जाता है। नगर निगम इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। किसी को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी नगर निगम प्रशासन की होगी।
एक महीने से शिकायत, फिर भी समाधान नहीं
उप नेता प्रतिपक्ष और पार्षद विशु देवांगन ने कहा कि वार्डों में गंदा पानी आने से लोग परेशान हैं। दूषित पानी की वजह से कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। इस समस्या से आयुक्त को अवगत कराया गया था, लेकिन एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से सोरीद, जोधपुर और डाक बंगला वार्ड के लोग गंदा पानी लेकर नगर निगम पहुंचे। वे चाहते हैं कि महापौर और आयुक्त खुद यह पानी देखें और इसकी स्थिति समझें।
20-25 मिनट ही मिल रहा पानी
नेता प्रतिपक्ष दीपक सोनकर ने कहा कि नगर निगम बेपरवाह हो गया है। शहरवासियों को साफ पानी उपलब्ध कराना नगर निगम की मुख्य जिम्मेदारी है, लेकिन वह इसमें भी सफल नहीं हो पा रहा है। पूरे शहर में इस तरह का पानी आने की शिकायत है और लोग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि शहर में पानी की सप्लाई भी सिर्फ 20 से 25 मिनट तक हो रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।