
दरअसल, कोटा के मिशन कंपाउंड स्थित सीएनआई चर्च की नई कमेटी के पदाधिकारियों पर हरीश लाल और उनके परिवार का सामाजिक बहिष्कार करने का आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार,आरोपियों ने परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। लोगों से अपील की थी कि वे पीड़ित परिवार से बातचीत न करें और उनके सुख-दुख में शामिल न हों।
पुलिस ने नहीं सुनी शिकायत, न्याय के लिए अदालत में गुहार
पीड़ित परिवार ने इस मामले की शिकायत पहले कोटा पुलिस से की, जिस पर राहत नहीं मिली तो पीड़ित ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दीप्ति बरवा की अदालत में अपील की। इस मामले को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने कोटा पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।
जिसके बाद पुलिस ने सौरभ पीटर्स, राजा सालोमान दास, अनिल मसीह, थियोडोर पीटर्स, सुनीलेश पीटर्स, सुलेमान दास और पास्टर मनीष आर. मसीह के खिलाफ बीएनएस की नफरत फैलाने, धमकी देने और नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
क्रिसमस और ईस्टर का अपमान करने का आरोप लगाकर बहिष्कार
हरीश लाल के अनुसार, नई कमेटी बनने के बाद से पिछले दो वर्षों से उन्हें लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका आरोप है कि 17 जनवरी को चर्च परिसर में बुलाई गई बैठक में उन पर झूठा आरोप लगाया गया कि वे क्रिसमस और ईस्टर जैसे धार्मिक पर्वों का अपमान कर रहे हैं। इसके बाद पूरे परिवार को “नॉट इन गुड स्टैंडिंग” घोषित कर समाज से बाहर कर दिया गया।
बिशप के आदेश को भी नहीं माना, गैरेज पर लगाया ताला
पीड़ित का कहना है कि संस्था के प्रमुख बिशप डायोसिस ऑफ छत्तीसगढ़, रायपुर ने स्पष्टीकरण जारी कर इस बहिष्कार को अवैध और असंवैधानिक बताया, तो आरोपियों ने कहा कि यहां हमारा कानून चलेगा। वे यहीं नहीं रुके, आरोपियों ने पीड़ित के मिशन कंपाउंड स्थित कार गैरेज के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। जिससे पीड़ित का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।