बालोद जिले में बिजली विभाग के निर्माण और मेंटेनेंस कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार सामने आ रही है। सोमवार को खपरी डीसी क्षेत्र में 11 केवी लाइन के 15 बिजली पोल शिफ्टिंग कार्य के दौरान भी श्रमिकों से बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों के काम कराए जाने की तस्वीरें सामने आईं।
शहर सहित जिलेभर में नई बिजली लाइन, ट्रांसफॉर्मर शिफ्टिंग, मेंटेनेंस और अवैध कनेक्शन हटाने जैसे कार्य चल रहे हैं, लेकिन इन कामों में लगे लाइनमैन और ठेका कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाने के आरोप लगते रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों में काम के दौरान लाइनमैन और ठेका कर्मचारियों की मौत के आधा दर्जन मामले सामने आ चुके हैं, जबकि कई कर्मचारी गंभीर रूप से घायल भी हुए हैं।
जानकारी के अनुसार विभाग में नियमित कर्मचारियों के साथ बड़ी संख्या में ठेका और आउटसोर्स कर्मचारी भी कार्यरत हैं। कई स्थानों पर उनसे बिना पर्याप्त सुरक्षा संसाधनों के ही ऊंचाई पर और बिजली लाइनों के बीच काम कराया जा रहा है। हेलमेट, सुरक्षा जैकेट, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट, सीढ़ी, डिस्चार्ज रॉड और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण हर कर्मचारी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
बिजली विभाग का कहना है कि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं और संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित रूप से सुरक्षा प्रशिक्षण भी दिया जाता है। हालांकि, लगातार सामने आ रहे हादसे और मौके पर दिख रही लापरवाही सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
बिजली कार्यों में लगे कई मजदूरों का कहना है कि रोजगार का दूसरा साधन नहीं होने के कारण वे जोखिम उठाकर भी काम करने को मजबूर हैं। उनका आरोप है कि पर्याप्त सुरक्षा संसाधन और बीमा जैसी सुविधाएं सभी को उपलब्ध नहीं कराई जातीं। ऐसे में किसी हादसे की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है।
जानिए पहले हुए कुछ हादसे
जिले में पिछले कुछ वर्षों में कई गंभीर हादसे हो चुके हैं। 8 जून 2025 को डांडेसरा में बिजली पोल लगाने के दौरान पोल का ऊपरी हिस्सा टूटकर मजदूर युगल किशोर गोटी के सिर पर गिर गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
21 अक्टूबर 2020 को पाररास वार्ड-1 में ठेका कर्मचारी महेंद्र साहू करंट की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था।
14 दिसंबर 2021 को चारभाठा मुख्य मार्ग पर बिना पर्याप्त सुरक्षा के पोल पर काम कर रहे कर्मचारी योगेश ठाकुर बिजली सप्लाई शुरू होने से झुलस गए थे।
वहीं 29 अगस्त 2024 को ग्राम लाटाबोड़ में विभागीय लापरवाही के चलते टूटे बिजली तार की चपेट में आने से किसान रामरतन ठाकुर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
विद्युत कार्यों के दौरान हेलमेट, सुरक्षा जैकेट, दस्ताने, सेफ्टी बेल्ट या झूला, सीढ़ी और डिस्चार्ज रॉड जैसे सुरक्षा उपकरण अनिवार्य माने जाते हैं।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई- कार्यपालन अभियंता
विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता एस.के. बंड ने कहा कि सभी ठेकेदारों को कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं भी सुरक्षा मानकों में लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।