
शाम 6 बजते ही गांँव में सन्नाटा। एक तरफ घने जंगल के तेंदुए और भालू का डर, दूसरी तरफ घर के अंदर जहरीले सांँप और बिच्छुओं का आतंक। बच्चों की पढ़ाई चौपट, महिलाओं को चूल्हा जलाने तक में दिक्कत। मोबाइल चार्ज नहीं, कोई इमरजेंसी हो तो भगवान ही मालिक।
*क्रेडा विभाग की खानापूर्ति*
ग्रामीणों का आरोप है।शिकायत करो तो एक मिस्त्री आता है, फोटो खींचता है, दो तार हिलाता है और चला जाता है। साहब, मरम्मत के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
*ग्रामीणों की हुंकार*
आखिरकार तंग आकर ग्राम पंचायत भूतबेड़ा की सरपंच श्रीमती दुखियाबाई मरकाम, उप सरपंच श्रीमती साधना बाई नेताम, प्रतिनिधि टीकम मरकाम, भीखऊ राम नेताम, अर्जुन सिंह मरकाम,अंगद राम नेताम,धनसाय नेताम, कवडू राम नेताम सहित पूरे गांँव ने कलेक्टर गरियाबंद को मरम्मत कराने की मांग की है।ग्रामीणों ने कहा – हमें भाषण नहीं, उजाला चाहिए।
बड़ा सवाल,,, क्या सुदूर वनांचल के आदिवासियों को अंधेरे में रखना ही विकास है। क्या क्रेडा विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।