
वहां उन्हें 5 घंटे तक बिना उचित इलाज के रखा गया। डॉक्टर उपलब्ध न होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। परिजनों का आरोप है कि जिला अस्पताल में भी 3 घंटे तक कोई सर्जन नहीं आया। वहां केवल दो इंजेक्शन लगाए गए।
जब संतोषी की हालत बिगड़ी, तो सर्जन ने ऑपरेशन करने से मना कर दिया। उन्हें चंदा देवी निजी अस्पताल भेज दिया गया। चंदा देवी अस्पताल ने महज आधे घंटे में 3000 रुपए का बिल बनाकर उन्हें रायपुर के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में उन्हें पलारी अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जैसा डॉक्टर बोले वैसा करते गए – परिजन
परिजनों ने बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों ने कहा कि गर्भवती महिला को प्रसव के लिए ताकत नहीं है। इसलिए रेफर कर दिया। ज्यादा पैसा नहीं होने के कारण डॉक्टर जैसे बोलते गए हम करते गए।
चंदा देवी अस्पताल के डॉक्टरों पर सवाल
पलारी अस्पताल के डॉक्टर विजीत पाठक ने बताया कि संतोषी की मौत आधे घंटे पहले ही हो चुकी थी। बच्चे की दिल की धड़कन भी नहीं थी। परिजनों ने स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है।