
इस कार्यक्रम में महापौर अलका बाघमार और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव समेत कई लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान महापौर ने मंच से अधिकारियों पर नाराजगी जताई। वीडियो में वह कहती दिखीं कि अधिकारी समय पर जानकारी नहीं देते और सिर्फ औपचारिकता निभाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर अधिकारी काम नहीं कर सकते तो कार्यक्रम में आने की जरूरत नहीं है। इसके बाद मामला और बढ़ गया। वहीं इस मामले पूर्व महापौर और कांग्रेस नेता धीरज बाकलीवाल ने कहा कि किसी को उसकी इच्छा के बिना रोकना गलत है।
जबकि महापौर अलका बाघमार ने मामले में सफाई देते हुए कहा कि किसी को बंधक नहीं बनाया गया था।
कार्यक्रम में हुई गड़बड़ी को लेकर जवाब मांगा
15 मई को आरोप है कि महापौर ने आरईएस विभाग के कार्यपालन अभियंता जेके मेश्राम, एसडीओ सीके सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे को अपने केबिन में बुलाया। उनसे कार्यक्रम में हुई गड़बड़ी को लेकर जवाब मांगा गया।
बताया जा रहा है कि जब जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया। इसके बाद एक अधिकारी ने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थानों की पुलिस टीम नगर निगम पहुंची।
पुलिस ने स्थिति संभाली और अधिकारियों को केबिन से बाहर निकाला।
धीरज बाकलीवाल ने विरोध किया
पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल ने इस घटना की आलोचना की। उन्होंने कहा कि किसी को उसकी इच्छा के बिना रोकना गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति के कारण अधिकारियों पर दबाव बनाना ठीक नहीं है।
महापौर ने दी सफाई
महापौर अलका बाघमार ने कहा कि अधिकारियों से सिर्फ जवाब लिया जा रहा था। उनका कहना है कि कई विभागों के बीच तालमेल की कमी से शहर के विकास कार्य रुक रहे हैं।
पहले भी वायरल वीडियो
बता दें कि कुछ दिन पहले भी महापौर का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह सड़क किनारे ठेला लगाने वालों पर नाराज होती दिखी थीं।