
प्रांतीय उपाध्यक्ष करण कुमार लावत्रे के अनुसार, भाजपा सरकार ने 100 दिनों में संविदा कर्मचारियों की मांगें पूरी करने का वादा किया था। डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
हड़ताल के कारण जिले की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हुई हैं। जिला अस्पताल, सीएमएचओ कार्यालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सभी सेवाएं बंद हैं। इनमें ओपीडी, आपातकालीन सेवाएं, प्रसव, गर्भवती जांच और टीकाकरण शामिल हैं। एसएनसीयू में भी आपातकालीन सेवाएं बंद हैं।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगे
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में संविलियन, स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ केडर की स्थापना, ग्रेड-पे निर्धारण और लंबित वेतन वृद्धि शामिल हैं। साथ ही वे नियमित भर्ती में आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति और मेडिकल सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।
कर्मचारियों ने पहले भी मई और जुलाई में सांकेतिक हड़ताल की थी। सरकार को 15 अगस्त तक का समय दिया गया था। हड़ताल से आम लोगों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं भी बंद हैं।