छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा सप्लाई की जा रही दवाओं की गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे

Chhattisgarh Crimesछत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा सप्लाई की जा रही दवाओं की गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे हैं।  पेरासिटामोल की तीन बैच को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं कि इनका उपयोग और वितरण तुरंत रोका जाए। साथ ही, इन बैच की दवाओं को रायपुर के दवा गोदाम में वापस भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

ये दवाइयां करीब पिछले दो साल से इस्तेमाल की जा रही थीं और अब एक्सपायर होने के कगार पर थीं। यानी ज़्यादातर दवाइयां पहले ही बांटी जा चुकी थीं। दो दिन पहले भी बच्चों को पिछले 14 महीनों से दी जा रही कृमि नाशक दवा एल्बेंडाजोल टैबलेट (D-12) के 6 बैच पर रोक लगाई गई थी और उनके इस्तेमाल को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए गए थे।

दवाओं के इन बैच पर लगाई गई रोक:

  • पेरासिटामोल 500 एमजी बैच नंबर : RT24032 निर्माता : 9M इंडिया लिमिटेड उपयोग में : पिछले 1 साल 6 महीने से
  • पेरासिटामोल 500 एमजी बैच नंबर : RT23547 निर्माता : 9M इंडिया लिमिटेड उपयोग में : पिछले 2 साल से
एसिक्लोफेनाक 100 एमजी + पेरासिटामोल 325 एमजी बैच नंबर : APC 508 निर्माता : हिलर्स लैब उपयोग में : 1 साल 30 दिन से

14 महीने से बच्चों को दी जा रही कृमि की दवाइयों पर लगा था बैन

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज लिमिटेड (CGMSC) ने बच्चों को दी जा रही कृमि की दवा एल्बेंडाजोल टैबलेट (D-12) के 6 बैच के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। ये दवाएं पिछले 14 महीने से अस्पतालों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दी जा रही थी।

इन दवाओं का इस्तेमाल रायपुर के अंबेडकर अस्पताल, डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों और बलौदाबाजार के अस्पतालों में किया जा रहा था।

इनमें से 4 बैच जून 2024 में बने थे, जो अब लगभग खत्म होने के कगार पर हैं। बाकी 2 बैच मार्च 2025 के हैं। इन दवाओं की सप्लाई अस्पतालों के साथ ही आंगनबाड़ी केंद्रों में भी की जाती है। इन सभी बैचों की दवाएं एफ्फी पैरेंटल्स कंपनी की हैं।

जारी आदेश के अनुसार, इन दवाओं का बचा हुआ स्टॉक अस्पतालों से वापस मंगाया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, ये दवाएं 14 महीने से ज्यादा पुरानी हो चुकी हैं। इसका मतलब है कि पिछले 14 महीनों से बच्चों को खराब दवाएं दी जा रही थीं।

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