
रायपुर एयरपोर्ट पर श्रद्धांजलि देने CM विष्णुदेव साय आने वाले थे, हालांकि वह नहीं पहुंच सके। जवानों के श्रद्धांजलि देने के बाद शहीद रंजीत के पार्थिव शरीर को एम्स भेजा गया। वहां से बस्तर के बालेंगा गांव ले जाया गया।
अब जानिए शहीद रंजीत कश्यप के बारे में ?
शहीद रंजीत कश्यप बस्तर जिले के बालेंगा गांव के रहने वाले थे। रंजीत 2016 में असम राइफल्स में भर्ती हुए। ग्रामीणों और दोस्तों के मुताबिक रंजीत पिछले महीने ही छुट्टी पर गांव आए थे। करीब एक महीने तक अपने परिजनों के साथ रहे। इसके बाद 14 सितंबर को वह ड्यूटी पर लौटे थे।
गांव के दोस्तों ने बताया कि रंजीत ने अपने साथियों से कहा था कि सेवा के तीन साल बाकी हैं। इसके बाद रिटायर होकर गांव लौट जाऊंगा और बुजुर्ग माता-पिता का सहारा बनूंगा, लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं है। हमारा अच्छा दोस्त था।
वहीं परिजन बताते हैं कि रंजीत का सपना देश की रक्षा करने का था। वह अपने परिवार का इकलौता बेटा था। अपने पीछे माता-पिता, पत्नी और तीन बेटियों को छोड़ गए हैं। रंजीत की तीन बेटियां हैं। एक बहन की शादी भी बीएसएफ जवान से हुई है। शहादत की खबर मिलते ही गांव में शोक है।