
बाढ़ से इंटेकवेल और सब स्टेशन को नुकसान पहुंचाया है। जिससे जल आपूर्ति बाधित हो गई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार, मरम्मत कार्य में लगभग 15 दिन लग सकते हैं।
पीएचई विभाग की मानी जा रही लापरवाही
बताया जा रहा है कि मौसम विभाग की चेतावनी के बाद भी पीएचई विभाग ने समय रहते डेम का गेट नहीं खोला। जिस कारण हसदेव नदी में बने इंटकवेल में पानी भर गया और तेज बहाव के कारण पाइप लाइन बह गया। नगर निगम क्षेत्र के 54 हजार लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।
जल्द सुधार कराने का आश्वासन
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि देश कई हिस्सों में बाढ़ और आपदा के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हुआ है। कई जगह शहर डूब गए हैं। यहां तो पाइप लाइन बहा है। पाइप मंगवाया गया है। पाइप उपलब्ध हो जाएगा तो सुधार कार्य के बाद पेयजल सप्लाई जल्द ही चालू करेंगे।
तब तक नगर पालिका मनेंद्रगढ़, नगर पंचायत झगड़ाखांड, नई लेदरी और खोंगापानी और एसईसीएल के टैंकरों से पानी मुहैया कराया जा रहा है।
भारी बारिश के कारण इंटेकवेल हुआ क्षतिग्रस्त
पीएचई विभाग के ई. ओमकार सिंह ने कहा कि इसे प्राकृतिक आपदा बोलेंगे। क्योंकि 6 जुलाई को 200 एमएम पानी रात भर में गिरा है। ये प्रकृति आपदा के अंतर्गत आता है। जिसके कारण बाढ़ आया है। इंटेकवेल का गेट का कोई अवचित नहीं है। वहां एक गेट खुला हुआ था। अगर सभी गेट खुले होते तो सारा पानी बह सकता था।
किसी को उम्मीद नहीं थी कि इतना बारिश होगा। क्योंकि चिरमिरी के लिए हमें पानी चाहिए। इसलिए सभी गेट नहीं खोला गए थे।